फैजाबाद। सा कला या विमुक्तये... अर्थात कला वह है जो मुक्ति प्रदान करती है, और कला की प्रस्तुति वही कर सकता है जो साधक हो। कला ही किसी देश की सभ्यता और संस्कृति का दर्शन कराती है। अत: कला का संरक्षण हम सब का परम कर्तव्य है और संस्कार भारती इन्हीं कला साधकों के हितार्थ संपूर्ण विश्व में कार्य कर रही है। ये बात संस्कार भारती के संस्थापक पद्मश्री बाबा योगेंद्र ने शुक्रवार रात मारवाड़ी सेवा सदन में संस्कार भारती द्वारा आयोजित सांस्कृतिक संध्या में बतौर मुख्य अतिथि कही।
कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. स्वदेश रश्मि ने वाणी वंदना से किया। इसके बाद लोक गायिका प्रतिमा यादव ने अवधी व बनारसी कजरी की प्रस्तुति दी। लोक गायन व लोक नृत्य की प्रस्तुति लोक कलाकार रचना श्रीवास्तव ने दी।
फरवाही नृत्य के कलाकार विजय यादव के संयोजन फरवाही नृत्य की प्रस्तुति व लोक गायक विवेक पांडेय के लोक गायन ने अवध की माटी की महक को मंच पर पुष्पित किया। संगीता अहूजा ने अपनी लोकनृत्य की प्रस्तुति, राष्ट्रीय कवि व संगीत नाटक अकादमी के सदस्य कमलेश मौर्य मृदु व ओज के कवि व संस्कार भारती के प्रांतीय मंत्री शिवकुमार व्यास ने अपनी रचनाएं सुनाईं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता सहकारी बैंक के सभापति धर्मेन्द्र प्रताप सिंह टिल्लू ने की। इस दौरान संस्कार भारती के संगठन मंत्री गिरीश चंद्र मिश्र, विभाग संयोजक हरीश कुमार श्रीवास्तव, भाजपा नेता अमल गुप्ता, उदासीन आश्रम के महंथ भरत दास, मं. बृजमोहन दास, मं. बलरामदास, भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष कमलाशंकर पांडेय, कृष्ण कुमार पांडेय खुन्नू, श्रीनिवास अग्रवाल, राकेश श्रीवास्तव, डा. अनुपम पाण्डेय समेत अन्य मौजूद रहे।