रामकथा संग्रहालय में इतिहास, कला व संस्कृति से जुड़ी अनमोल धरोहरों का संग्रह
अयोध्या। रामायण व इतिहास का खजाना, विभिन्न राज्यों की बेहतरीन कलाकृतियां, यह सब एक साथ देखने का अवसर प्रदान करता है रामनगरी का अंतरराष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय। विद्यार्थियों, शोधार्थियों व कला जिज्ञासुओं के लिए संग्रहालय में इतिहास, कला व संस्कृति और रामकथा से जुड़ी अनमोल धरोहरों का संग्रह है।
विश्व संग्रहालय दिवस के अवसर पर अयोध्या के अंतरराष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय का जिक्र आवश्यक हो जाता है। रामकथा संग्रहालय की स्थापना 1988 में हुई थी। तुलसी स्मारक भवन में स्थित रामकथा संग्रहालय में अतीत को दर्शाती विभिन्न कलाओं और कलाकृतियों, सिक्कों, ताड़ के पन्नों के पांडुलिपियों और मिट्टी के बर्तन आदि का एक समृद्ध संग्रह है। यहां देश ही नहीं बल्कि अन्य देशों की रामकथा और उनकी सचित्र कहानियों का भी सुंदर वर्णन है। इसके साथ ही रामायण और विभिन्न रामलीलाओं के वस्त्र भी रखे गए हैं। अयोध्या परिक्षेत्र के पुरावशेषों, दुर्लभ सांस्कृतिक संपदा व प्रदर्श कलाओं व अनुकृतियों एवं छायाचित्रों का दुर्लभ संकलन यहां देखने को मिलता है।
संग्रहालय में अभी तक 971 कलाकृतियों का संकलन हो चुका है। जिसमें से 170 कलाकृतियों को संग्रहालय वीथिकाओं में प्रदर्शित किया गया है। प्रदर्शित सामग्री में प्रस्तर कलाकृति 61, मिट्टी की 40, हाथी दांत की तीन, काष्ठ की तीन, धातु सामग्री 30, वस्त्र सामग्री नौ, थाईलैंड की कला सामग्री 19 तथा कला प्रदर्शनी के 88 चित्रों को प्रदर्शित किया गया है। कलाकृतियों का प्रदर्शन शोकेश व पैडेस्टल तथा डिस्प्ले बोर्ड पर किया गया है। राष्ट्रीय संग्रहालय नई दिल्ली में संग्रहीत राम, लव एवं कुश की प्राचीन प्रस्तर मूर्तियों की फाइबर अनुकृतियां तैयार कराकर संग्रहालय में प्रदर्शित की गई है।
संरक्षित हैं गुमनामी बाबा की 425 वस्तुएं
फैजाबाद के रामभवन से मिली गुमनामी बाबा की करीब 32 सौ वस्तुओं में से 425 सामानों को अयोध्या के रामकथा संग्रहालय में संरक्षित किया गया है। इन सामानों में टाइपराइटर, रिकॉर्ड प्लेयर, पूजन सामग्री, बाबा का अस्थि कलश, करेंसी, टेप रिकॉर्डर, सिगार-सिगरेट, विदेशी दूरबीन, चश्मा, घड़ी, माला, कमंडल सहित अंग्रेजी, हिंदी, संस्कृत एवं बंग्ला भाषा की तीन सौ से अधिक पुस्तकें आदि शामिल हैं।