अयोध्या। मंडल कारागार में निरुद्ध शातिर अपराधियों ने शनिवार को जमकर उपद्रव किया। अपनी धाक जमाने के लिए बंदियों के साथ जेल पुलिस के जवानों पर भी पथराव किया, जिससे 10 लोग घायल हो गये। कारागार में लगभग छह घंटे तक अफरातफरी का माहौल रहा।
स्थिति इतनी खराब हो गई कि बाहर से भारी संख्या में फोर्स को जेल के अंदर भेजना पड़ा। सूचना पर पहुंचे प्रशासन और पुलिस के अफसर चार घंटे तक जेल में डटे रहे। घायल बंदियों और पुलिस कर्मियों को जिला अस्पताल लाया गया। जिलाधिकारी डॉ. अनिल कुमार ने जेल अधीक्षक से घटना की रिपोर्ट मांगी है। इस बीच डीआईजी जेल श्रीपर्णा गांगुली भी यहां पहुंच र्गइं। देर शाम बताया गया कि मंडल कारागार में हालात सामान्य हो गये हैं।
घटना शनिवार की सुबह लगभग नौ बजे की है। यहां जेल दिवस के आयोजन को लेकर तैयारियां चल रही थीं। जेल प्रशासन और सजायाफ्ता बंदी इसकी तैयारी कर रहे थे। इस बीच शातिर अपराधी गिरोहों के तीन दर्जन से ज्यादा बंदियों ने अचानक अपनी बैरकों से निकलकर दूसरे बंदियों और पुलिसकर्मियों पर हमला बोल दिया।
कुछ देर तक तो लोगों की समझ में नहीं आया कि हो क्या रहा है। हमला करने वाले बंदी दूसरों की पिटाई कर रहे थे और गालियां दे रहे थे। स्थिति नियंत्रण से बाहर हुई तो जेल अधीक्षक ने जिला प्रशासन से मदद मांगी। आनन-फानन पीएसी के साथ भारी संख्या में फोर्स, दंगा नियंत्रण वाहन, फायर दस्ते के साथ जेल के अंदर दाखिल हुई। लेकिन उपद्रव इतना जबरदस्त था और हमला करने वाले आक्रमण का तरीका बदल रहे थे। इसलिए जेल परिसर में बवाल पर नजर रखने के लिए ड्रोन कैमरे का इस्तेमाल किया गया।
फोर्स की आमद देख बंदियों ने ईंट-पत्थर चलाना शुरू कर दिया। इससे भी बात नहीं बनी तो किचन में रखे बर्तनों से पुलिस और बंदियों पर प्रहार शुरू कर दिया। यही नहीं इन बंदियों ने अपनी सुरक्षा के मद्देनजर दूसरे कई सामान्य बंदियों को बंधक बना लिया। पुलिस का दबाव बढ़ने पर बंदी गैस सिलिंडर से विस्फोट की चेतावनी देने लगे। जिससे लगभग छह घंटे तक अफरातफरी का आलम रहा।
सूचना पर डीएम डॉ अनिल कुमार, एसएसपी जोगेंद्र कुमार भी मौके पर पहुंचे। अफसरों की टीम लगभग ग्यारह बजे जेल में दाखिल हुई। इसके बाद बंदियों से बातचीत और घायल बंदियों को जिला अस्पताल भेजने का सिलसिला शुरू हुआ।
इनको आईं चोटें
राम सुमिरन मिश्रा निवासी पलिया लोहानी, अशोक यादव निवासी अंबेडकरनगर, शारदा प्रसाद मिश्रा निवासी इनायतनगर, मुकेश निवासी सोहावल, धर्मेंद्र निवासी लालदास का पुरवा दर्शननगर, अनूप उपाध्याय निवासी खिद्दिरपुर जहांगीरगंज, भोला निवासी मसौधा व रामअचल। दो सिपाहियों राधेश्याम यादव व आफताब आलम को भी जिला अस्पताल लाया गया।
इनसेट..
घटना के पीछे मोबाइल इस्तेमाल व दबदबा बनाने की कोशिश
मंडल कारागार में हुए उपद्रव के पीछे चर्चा है कि बवाली बंदी गोल बनाकर मोबाइल का इस्तेमाल अपने स्वार्थसिद्धि के लिए करना चाहते थे। इसके साथ ही इसमें ऐसे कई बंदी भी शामिल हैं, जो जेल में अपना दबदबा बनाने के प्रयास में हैं। इन बंदियों को अभी कुछ ही दिन पहले जेल में एंट्री दी गई है।
बंदियों की जुबानी
जिला अस्पताल लाए गये बंदियों में कई को यह भी पता नहीं चला कि उन्हें किसलिए पीटा गया। लेकिन राम सुमिरन मिश्रा ने एक बंदी का नाम लेते हुए बताया कि उसने बैट से पीटा। काफी दिनों से जेल में निरुद्ध शारदा प्रसाद मिश्रा का कहना था कि हमलावरों ने उसे गाली दी, कहा दबदबा बनाए हो और पीटा। बंदी अशोक यादव का कहना था कि विवाद के दौरान वह वहां पहुंचे तो हमलावरों ने उन्हें गिराकर जमकर मारापीटा। कारागार के अंदर पुराने बंदी भोला हमले के समय स्नान करने जा रहे थे। उनका कहना था कि ऐसा लगा कि जैसे हमलावर ढूंढ-ढूंढ कर बंदियों को पीट रहे हैं।
जेल और जिला अस्पताल छावनी में तब्दील
बंदियों के उपद्रव के बाद मंडल कारागार में भारी संख्या में पुलिस बल मुस्तैद कर दिया गया। घायलों को जिला अस्पताल पहुंचाने के बाद अस्पताल में भी भारी संख्या में पुलिस कर्मियों को सुरक्षा की दृष्टि से तैनात किया गया। इस दौरान दोनों परिसर छावनी में तब्दील हो गये। अपराह्न करीब तीन बजे मामला शांत होने पर पुलिस बल को हटाया गया।
वर्जन
बवाल करने वाले बंदियों की पहचान
जेल की प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए जेल प्रशासन की मदद करने वाले बंदियों और जेल पुलिस पर हमला किया गया। पुलिस कर्मियों से हमलावर बात करने के लिए मोबाइल मांग रहे थे। प्रशासनिक व्यवस्था में सहयोग करने वाले बंदियों के साथ ही अन्य को हमलावरों को निशाना बनाया। इनकी संख्या 35 से 40 थी। कई के नाम सामने आ गये हैं। अब स्थिति सामान्य है, घटना की पूरी रिपोर्ट भेजी जाएगी। आगे निर्देश के मुताबिक कार्रवाई होगी।
-बृजेश कुमार, अधीक्षक मंडल कारागार अयोध्या
वर्जन
जेल अधीक्षक से मांगी रिपोर्ट
पूरे घटनाक्रम के बारे में बंदियों से बात की गई है। मामले की रिपोर्ट जेल अधीक्षक से मांगी गई है। उसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। बंदियों को समझा कर शांत कराया गया है। जेल में अब स्थिति सामान्य है।
- डॉ अनिल कुमार, जिलाधिकारी