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अयोध्या मामले के पक्षकारों का दिल्ली में डेरा

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अयोध्या। अयोध्या मामले में सात साल बाद फिर सुनवाई शुरू होने जा रही है। सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ अयोध्या के रामजन्मभूमि/बाबरी मस्जिद विवाद की सुनवाई मंगलवार से रोजाना करेगी। 2010 में हाईकोर्ट के निर्णय के बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया था। अब पुन: इस बहुप्रतीक्षित मामले में सुनवाई शुरू होने जा रही है।
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इसको लेकर माहौल भी गर्म है। सुनवाई में शामिल होने के लिए मामले से जुड़े कई पक्षकारों ने भी दिल्ली में डेरा डाल दिया है। हिन्दू पक्षकार व निर्वाणी अनी के श्रीमहंत धर्मदास एक सप्ताह से ही दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं। मुस्लिम पक्षकार हाजी महबूब भी दिल्ली पहुंच गए हैं।

वे पांच दिसंबर की रात दिल्ली से वापस अयोध्या आएंगे और छह दिसंबर को यौमे गम में शरीक होकर पुन: दिल्ली के लिए रवाना होंगे। निर्मोही अखाड़ा के पक्षकार राजारामचन्द्राचार्य भी वकीलों संग दिल्ली पहुंच गए हैं। बाबरी मस्जिद के मुद्दई स्व. हाशिम अंसारी के पुत्र इकबाल अंसारी दिल्ली नहीं जा पाए हैं।
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उन्होंने कहा कि वे घर से ही समाचार चैनलों के माध्यम से मामले की सुनवाई पर नजर रखेंगे। सभी पक्षकारों का कहना है कि मामले में सुनवाई शुरू हो रही है यह अच्छी बात है, उम्मीद है कि शीघ्र ही मामला निपट जाएगा। पक्षकारों ने यह भी कहा कि कोर्ट का जो निर्णय आएगा वह मान्य होगा, बस किसी तरह इस विवाद का निपटारा होना चाहिए।

समाधान से विकास का मार्ग होगा प्रशस्त : महंत दिनेंद्रदास
निर्मोही अखाड़ा अयोध्या के महंत दिनेंद्रदास का कहना है कि अयोध्या मामले में ऐसा हल निकले जो सर्वमान्य हो। निर्मोही अखाड़ा की ओर से पक्षकार व अखाड़ा के सरपंच महंत राजारामचन्द्राचार्य, अधिवक्ता रणजीत लाल वर्मा दिल्ली पहुंच गए हैं।

सुनवाई शुरू होने के बाद ही कोर्ट का रुख पता चल सकेगा। महंत दिनेन्द्रदास ने विश्वास जताया कि इस मामले का अब शीघ्र समाधान होगा और रामनगरी के विकास का मार्ग प्रशस्त होगा। इस विवाद ने अयोध्या को विकास के रास्ते से दूर कर दिया है।

कायम रहेगी अयोध्या की गंगा-जमुनी तहजीब : महंत धर्मदास
मामले में पक्षकार व निर्वाणी अनी के महंत धर्मदास ने कहा कि अदालत का निर्णय जो भी आए अयोध्या की गंगा-जमुनी तहजीब कायम रहेगी।

किसी भी कीमत पर आपसी प्रेम, सद्भाव को बिगड़ने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि उनके गुरु अभिराम दास ने मूर्ति रखी थी, इसलिए मूर्ति का सेवक उन्हें बनाया जाए, ऐसी मांग अदालत से रखी जाएगी। उम्मीद है कि फैसला हमारे ही हक में आएगा। अयोध्या में रामजन्मभूमि है, यह पहले ही तय हो चुका है।

अदालत का फैसला ही मान्य होगा : हाजी महबूब
मुस्लिम पक्षकार हाजी महबूब भी दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं। उन्होंने कहा कि वकीलों का पैनल सुनवाई के लिए तैयार है। उन्होंने बताया कि वे करीब चार दिन से दिल्ली में हैं।

पांच को वापस अयोध्या जाएंगे और छह दिसंबर को अयोध्या में परंपरागत रूप से आयोजित यौमे गम समारोह में शामिल होने के बाद दिल्ली को रवाना होंगे। हाजी महबूब ने कहा कि अभी इस मामले में बोलना जल्दबाजी होगा। कोर्ट को जो भी निर्णय आएगा, वह मान्य होगा।

इकबाल अंसारी बोले- निजी खर्च में दिल्ली जाने की स्थिति में नहीं
बाबरी मस्जिद के मुद्दई स्व. हाशिम अंसारी के पुत्र इकबाल अंसारी पांच दिसंबर से शुरू हो रही सुनवाई में शामिल होने के लिए दिल्ली नहीं गए हैं।

उन्होंने बताया कि वे अपने निजी खर्च पर दिल्ली जाने की स्थिति में नहीं है। जब सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड उन्हें बुलाएगा, तभी जाएंगे। मामले में अभी सुनवाई शुरू हो रही है, जब पक्षकारों को बुलाया जाएगा, तब वे सुनवाई में शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि मामले का समाधान जितनी जल्दी होगा, उतनी ही जल्दी अयोध्या की सूरत बदलेगी।

अयोध्या के नाम पर चल रही राजनीति का भी समापन हो जाएगा। सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की तरफ से जफरयाब जिलानी मामले में पैरवी कर रहे हैं। इकबाल अंसारी ने अपनी सुरक्षा पर भी सवाल उठाया।

कहा कि मेरे महरूम वालिद की सुरक्षा में चार सुरक्षाकर्मी लगाए गए थे लेकिन उन्हें एक सुरक्षाकर्मी दिया गया है। योगी सरकार बनने के बाद सुरक्षा घटा दी गई है। सुरक्षा कम होने के कारण भी कहीं नहीं आता-जाता।
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