अयोध्या। कलेक्ट्रेट के राजस्व अभिलेखागार के कागजात में हेराफेरी कर करोड़ों रुपये की सरकारी जमीन भू-माफिया के नाम करने का मामला सामने आया है।
डीएम के आदेश पर सीआरओ की जांच में मामला खुला। अब डीएम ने मामले में रिकार्ड रूम के नायबदेही और बस्ता बरदार को निलंबित करते हुए नगर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराने का आदेश दिया।
अभिलेखपाल ने रिपोर्ट दर्ज करने के लिए तहरीर दी है, मगर अनुचित लाभ प्राप्त करने वाले भू-माफिया के खिलाफ अभी कार्रवाई नहीं हो सकी है।
कजियाना निवासी मो. अलीम, मो. निहालुद्दीन और मो. अमीन ने राजस्व परिषद में जमीन में हेराफेरी की शिकायत की थी।
उनका आरोप था कि अयोध्या से सटी करोड़ों रुपये कीमत की बाग बिजैसी की आबादी, बंजर और भीटे की कुल 4.16 बीघे भूमि को अभिलेखागार में मौजूद अभिलेखों में फर्जीवाड़ा कर हैवतपुर बाग बिजैसी के रहने वाले रमाकांत पांडेय के नाम दर्ज करा दिया गया।
इसके बाद जिलाधिकारी अनुज कुमार झा ने मुख्य राजस्व अधिकारी पीडी गुप्त को इसकी जांच सौंपी। जांच में अभिलेखागार में उपलब्ध जमीनों के अभिलेख में कूट रचना करना पाया।
फर्जी आदेश और अभिलेखों में नए पेज लगाकर इसे दर्ज किया गया। सीआरओ ने अपनी रिपोर्ट में हेराफेरी कर दूसरे के नाम अंकित जमीनों को पूर्व अंकित किए जाने के साथ अभिलेखागार के नायब देही राजकिशोर और बस्ता बरदार शिवपूजन को दायित्व के निर्वहन का दोषी करार देते हुए कार्रवाई की संस्तुति की थी।
जिलाधिकारी ने रिपोर्ट के आधार पर अभिलेखों में हेराफेरी के लिए एफआईआर दर्ज कराने, दोनों कर्मियों को तत्काल निलंबित करने के साथ अनुशासनहीनता की कार्रवाई और अभिलेखों में नाम खारिज करने की कार्रवाई का आदेश दिया। इसके बाद दोनों कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया। दोनों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए अभिलेखपाल ने तहरीर दे दी है।
ऐसे की गई राजस्व अभिलेखों में हेराफेरी
बाग बिजेसी की आबादी की जमीन गाटा संख्या 257, 259, 260, 292 आबादी के खाते, गांटा संख्या 261 अ, 261ब, 261ज बंजर खाते में और 291अ, 292 ब भीटा के खाते में दर्ज थी। अभिलेखों में खेल फसली 1363 से 1365 के बीच की गई।
तहसीलदार के फर्जी आदेश से इसे इन नंबरों का खातेदार राजबहादुर वल्द सूर्य नारायण बना दिया। इसके बाद तो एक से बढ़कर एक खेल किए गए। फ्राड करने वालों ने अनुचित लाभ देने के लिए केवल एक बार अभिलेखों में हेराफेरी नहीं की बल्कि वरासत के जरिए इसे फसील 1382 से 1387 के बीच राजबहादुर के पुत्र शिवमूर्ति के नाम लाया गया।
फिर फसली 1396-1401 के बीच इसे शिवमूर्ति के पुत्र रमाकांत पांडेय के नाम दर्ज कर दिया गया। इसके लिए फाइल में पेज हटाकर नए पेज लगाए गए, पेज कम कर दिए गए। लेकिन यह खेल केवल अभिलेखागार के राजस्व अभिलेखों में ही किया गया। कंप्यूटराइज्ड खतौनी में पुराने इंद्राज बताए गए।
शिकायत नहीं होती तो करोड़ों के मालिक रहते भू-माफिया
यदि राजस्व परिषद में शिकायत न की गई होती तो अभिलेखों में हेरा-फेरी करके भू माफिया द्वारा करोड़ों की जमीन हड़पने का यह सनसनीखेज मामला नहीं खुलता।हालांकि शिकायत पहले भी कई बार पोर्टल से लेकर जरिए रजिस्ट्री आदि तरीके से की गई थी, मगर लेन-देन कर हर बार रिपोर्ट पक्ष में लग जा रही थी। इसबार राजस्व परिषद की सख्ती से मामला सामने आया।
भू-माफिया कार्रवाई के दायरे से फिलहाल बाहर
राजस्व अभिलेखों में हेरा-फेरी के बाद लाभ लेने वाला भू-माफिया अभी कार्रवाई के दायरे से बाहर है। अभी तो केवल विभाग के लोगों पर कार्रवाई की गई है। मगर इस हेराफेरी को करवाने में शामिल रहे लोगों पर अभी प्रशासन का शिकंजा नहीं कसा है जबकि करोड़ों की बेशकीमती जमीन का लाभ तो उन्हीं को मिलता। चर्चा में जिम्मेदार कहते हैं कि विभाग में कार्रवाई पूरी होने के बाद इस पर विचार हो सकता है।
और भी हो सकते हैं ऐसे मामले
-शहर और उससे सटी जमीन को लेकर ऐसे और भी मामले हो सकते हैं। नजूल की जमीनों पर अवैध कब्जे पहले भी पकड़ जा चुके हैं। कई साल पहले ऐसी जमीनों पर नजर गड़ाए कुछ लोगों को चिह्नित भी किया गया था। राजस्व अमले की निगहबानी पैनी होने पर ऐसे मामलों पर अंकुश लग सकता है।
राजस्व अभिलेखागार के अभिलेखों में हेराफेरी करके चार बीघा 16 बिस्वा सरकारी जमीन को दूसरे का नाम किए जाने का मामला पकड़ा गया। जिलाधिकारी के आदेश पर रिकार्ड रूम के नायब देही और बस्ताबरदार के खिलाफ के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जा रही है। साथ ही दोनों कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है।
पीडी गुप्त, मुख्य राजस्व अधिकारी