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मानसून की देरी से खेती-किसानी चौपट होने के आसार

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अयोध्या। आधा जून बीत चुका है। अभी तक मानसून ने प्रदेश में दस्तक नहीं दी है। फिलहाल 15 दिनों तक अभी मानसून के आने की संभावना नहीं है।
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एनडी विवि के मौसम वैज्ञानिक अमर नाथ मिश्रा की मानें तो अब जुलाई के प्रथम सप्ताह में मानसून दस्तक दे सकता है। मानसून की देरी से किसानों के माथे पर बल पड़ता दिखाई दे रहा है।


मौजूदा समय में जायद की फसल व जल्द शुरू होने वाली खरीफ की फसल पूरी तरह से प्रभावित होने के आसार हैं। किसानों का मानना है कि प्री-मानसून बरसात न होने से दलहनी फसल बुरी तरह से प्रभावित रही है। धान की फसल पर मानसून से देर से आने का प्रभाव दिखाई देगा।
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आमतौर पर उत्तर प्रदेश में मानसून आने का समय 16 से 20 जून है। लेकिन इस बार मानसून के काफी लेट होने की संभावना जताई जा रही है। अभी मानसून केरल से चलकर उड़ीसा तक ही पहुंच पाया है।


केरल में भी मानसून आठ दिन लेट पहुंचा है। मौसम वैज्ञानिक अमर नाथ मिश्रा का मानना है कि केरल में आठ दिन लेट पहुंचा मानसून अलनीनों से प्रभावित है।


बंगाल की खाड़ी से उठने वाली पुरवा हवा की नमी प्रशांत महासागर में सक्रिय अलनीनो शोषित कर ले रहा है। इससे मानसून रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा है।


हालांकि इसका प्रभाव कम होते ही केरल में आठ जून को मानसून पहुंच गया है लेकिन गुजरात व राजस्थान में आने वाले ‘वायु’ तूफान ने केरल पहुंचे मानसून को फिर से प्रभावित किया है।


उड़ीसा पहुंचने में मानसून को 15 जून का समय बीत गया है। हालांकि इस मानसून को अब तक उत्तर प्रदेश में होना चाहिए था।


अब मानसून को छत्तीसगढ़, बिहार होते हुए उत्तर प्रदेश तक पहुंचने में कम से कम 15 दिन का समय लगेगा। मानसून के जुलाई के प्रथम सप्ताह में आने की संभावना है।


दूसरी ओर मानसून की लेटलतीफी से किसान परेशान हैं। वे अपनी दलहनी व धान की फसलों को लेकर चिंतित हैं। सोहवल के किसान ओम प्रकाश सिंह कहते हैं कि अब तक धान के बैरन में तीन बार पानी लगाना पड़ गया है।


अगर मानसून जुलाई में आता है तो खेती-किसानी पूरी तरह से प्रभावित होगी। किसान हरिश चंद पांडेय बताते हैं कि प्री-मानसून बरसात न होने व मानसून के देर से आने के कारण दलहनी फसल पूरी तरह से प्रभावित है। पैदावार कम होने के साथ किसानों को अपनी पूंजी निकालने में भी दिक्कत आएगी।


खेती-किसानी प्रभावित होना तय
एनडी विवि के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक एके सिंह का मानना है कि मानसून की देरी से खेती-किसानी प्रभावित होना तय है। कारण यह है कि वर्षा का समय सामान्य तौर पर 15 जून से सितंबर तक माना जाता है।


वैसे भी इस बार का मानसून के कमजोर रहने की संभावना है लेकिन अगर मान भी लिया जाए कि सामान्य बारिश हो जाएगी तो इसके वितरण में दिक्कत आएगी। अगर किसी माह में सामान्य से अधिक भी बारिश हो जाती है तो इसका खेती-किसानी को कोई फायदा मिलने वाला नहीं है।


आज हो सकती है प्री-मानसून बरसात
जिले में अभी तक एक बार भी प्री-मानसून बरसात नहीं हो सकी है। एनडी विश्वविद्यालय के जारी पूर्वानुमान के अनुसार 19 व 20 जून को प्री-मानसून बरसात हो सकती है।
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अलनीनो व वायु तूफान के चलते मानसून आने में 15 दिन की देरी हो चुकी है। जिस मानसून को अब तक यूपी में दस्तक दे देना थी, वह अभी उड़ीसा तक ही पहुंच पाया है। यूपी तक सक्रिय रूप से मानसून आने में जुलाई का प्रथम सप्ताह बीत जाएगा।
डॉ. अमरनाथ मिश्रा, मौसम वैज्ञानिक, एनडी विवि
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