फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पूर्वांचल के एकमात्र कृषि विवि में तेजी से घट रहे विद्यार्थी

विज्ञापन
विज्ञापन
अयोध्या। पूर्वांचल के 16 जिलों में एकमात्र आचार्य नरेंद्रदेव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की हालत दिनोंदिन खस्ता होती जा रही है। लगातार घटती विद्यार्थियों की संख्या प्रशासन की चिंता का सबब बनी हुई है।
विज्ञापन



विगत तीन वर्ष के शैक्षिक सत्र में पीजी व शोध के विभिन्न विषयों में विद्यार्थियों की संख्या 50 प्रतिशत से अधिक घट गई है। इस साल भी शुरू हुई काउंसिलिंग में सूबे के चार कृषि विवि में ये विवि छात्रों की पंसद में सबसे पीछे है।


हालत इतनी खराब है कि होम साइंस में 20 सीटों के सापेक्ष एक भी छात्र मिलना मुश्किल हो गया है। विद्यार्थी इस हालात की वजह विवि में पठन-पाठन के लगातार गिरते स्तर को मान रहे हैं।
विज्ञापन



अक्तूबर 1995 में स्थापित इस विवि की ख्याति कभी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर थी। विश्व के कई देशों के छात्र पढ़ने व शोध करते यहां आते थे, मगर अब एनआरआई सीटें खाली रह जाती हैं। विवि में विद्यार्थियों की संख्या में लगातार गिरावट आ रही है।


विश्वविद्यालय के शोध, शिक्षा एवं प्रसार तीन मुख्य अंग हैं। मगर पठन-पाठन में मानव व संसाधन की कमी से हालात बदतर होते जा रहे हैं। शैक्षिक सत्र 2016-17 में शोध के लिए विभिन्न विषयों में विश्वविद्यालय द्वारा 77 सीटें निर्धारित की गई थीं, मगर केवल 32 सीटों पर ही शोध छात्रों ने प्रवेश लिए, जबकि 45 सीटें रिक्त रहीं।


वहीं, शैक्षिक सत्र 2017-18 में निर्धारित 77 सीटों में 39 सीटों पर प्रवेश हो सका जबकि 38 सीटें खाली रह गईं। शैक्षिक सत्र 2018-19 में विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित सीटों की संख्या में इजाफा किया गया मगर हालात नहीं सुधरे। 81 सीटों के सापेक्ष मात्र 47 शोध छात्रों ने प्रवेश लिया।


परास्नातक स्तर पर भी यही हाल है। वर्ष 2016-17 में एमएससी होम साइंस की निर्धारित 20 सीटों में से केवल एक सीट भर पाई। वर्ष 2017-18 में निर्धारित 20 सीटों में से तीन सीटें भर पाईं।


वर्ष 2018-19 में सीटों की संख्या कम कर दी गई, फिर भी 15 सीटों में केवल एक सीट पर छात्रा ने प्रवेश लिया। एमएससी एग्रीकल्चर के लिए वर्ष 2016-17 में कुल निर्धारित 201 सीटों में से 136 सीटों पर प्रवेश हो सका और 65 सीटें खाली रहीं।


वर्ष 2017-18 में निर्धारित सीटों की संख्या 197 में से 146 सीटें भर पाईं और 91 सीटें खाली रहीं। वर्ष 2018-19 में 215 सीटों के सापेक्ष केवल 134 सीटें भरी गईं, 81 सीटें खाली रहीं।


मास्टर ऑफ वेटरनरी साइंस में वर्ष 2016-17 में निर्धारित 69 सीटों के सापेक्ष 13 सीटें भरी गईं और 56 सीटें खाली रही। वहीं वर्ष 2017-18 में निर्धारित 69 सीटों के सापेक्ष 16 सीटें भरी गईं और 53 सीट रिक्त रहीं।


शैक्षिक सत्र 2018-19 में निर्धारित 100 सीटों के सापेक्ष केवल 12 सीटें भरी गईं और 88 सीटें खाली रहीं। स्नातक स्तर पर बीएससी एजी में वर्ष 2016-17 में निर्धारित 132 के सापेक्ष केवल 125 छात्रों ने प्रवेश लिया, वहीं 2017-18 में छात्रों की संख्या घटकर 120 हो गई और वर्ष 2018-19 में ये संख्या घटकर 118 हो गई। स्नातक के अन्य विषयों में भी इसी प्रकार छात्र संख्या प्रभावित रही।


एनडी कृषि विवि के कुलपति प्रो. जेएस संधू का कहना है कि छात्र संख्या प्रभावित होने के कई कारण हो सकते हैं। विश्वविद्यालय में सरकार द्वारा कुछ सीटें जो कि नॉन पेड होती हैं वह तो भर जाती हैं परंतु पेड सीट एवं एनआरआई के लिए निर्धारित सीटों में काफी समस्या होती है।


ये सीटें खाली ही रह जाती हैं। विवि में शिक्षकों व अन्य संसाधनों की कमी दूर कराने के साथ ही कैंपस प्लेसमेंट के लिए भी प्रयास तेज किए जा रहे हैं।


वहीं, नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कुमारगंज में शैक्षिक वातावरण को लेकर जब छात्रों से राय ली गई तो उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय चार्ट के अनुरूप परिणाम नहीं दे पाता।


बीएससी फाइनल ईयर के छात्र रामेश्वर दयाल का कहना है कि इन्हें मास्टर डिग्री के लिए अन्य किसी कृषि विश्वविद्यालय में जाना होगा क्योंकि यहां कंपटीशन का माहौल नहीं है।


होम साइंस से स्नातक अंजली यादव मास्टर डिग्री के लिए चंद्रशेखर कृषि विश्वविद्यालय कानपुर जाना चाहती हैं। इन्हें वहां का शैक्षणिक माहौल यहां की अपेक्षा अधिक प्रभावी लगता है।


बीएससी फाइनल ईयर के छात्र एमबी यादव मास्टर डिग्री किसी अन्य कृषि विश्वविद्यालय से करना चाहते हैं, इन्हें यहां का शैक्षणिक वातावरण अधिक प्रभावी प्रतीत नहीं हो रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें