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मरीजों पर आफत बनकर टूटी डॉक्टरों की हड़ताल

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मरीजों पर आफत बनकर टूटी डॉक्टरों की हड़ताल
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अयोध्या। पश्चिम बंगाल में डॉक्टरों पर हुए प्राणघातक हमले के विरोध में आईएमए की हड़ताल का सोमवार को जिले में व्यापक असर दिखा। सभी निजी अस्पतालों में इलाज ठप होने से मरीजों में हाहाकार मच गया।


तमाम मरीज घर लौट आए, जबकि गंभीर हालत में कइयों को जिला अस्पताल ले जाना पड़ा, जहां भीड़ से चिकित्सकीय इंतजाम ध्वस्त होते दिखे। मरीजों की कतारें लगने पर भी चिकित्सक के दर्शन नहीं हो पाए।
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जिले में बेडयुक्त करीब 178 निजी अस्पताल संचालित हैं, जहां ओपीडी सेवाएं संचालित होती हैं। सोमवार को हड़ताल से निजी अस्पतालों में जाना मरीजों को भारी पड़ गया। कई मरीज गंभीरावस्था में अस्पताल के बाहर व अंदर कराहते रहे, लेकिन चिकित्सक अपने निर्णय पर डटे रहे।


हालात ये रहे कि अधिकांश अस्पतालों में तालाबंदी की स्थिति रही। कुछ बड़े अस्पताल तो खुले रहे, मगर वहां सिर्फ भर्ती मरीजों का ही इलाज किया गया। डॉक्टर सुबह राउंड लेकर मरीजों का हालचाल जानने के बाद ओपीडी में नहीं बैठे।


निजी अस्पतालों में हड़ताल के बाद मजबूरी में मरीज जिला अस्पताल पहुंचे, मगर वहां उन्हें अव्यवस्थाओं से जूझना पड़ा। प्रतिदिन डेढ़ हजार तक पहुंचने वाली ओपीडी सोमवार को करीब दो हजार पहुंच गई। ओपीडी मरीजों से खचाखच भरी रही।


बाहर बैठने के पर्याप्त इंतजाम न होने से फर्श पर ही मरीजों को बैठना पड़ा। 12 बजे तक एक्सरे सेवा मिलने की बाध्यता की वजह से व अल्ट्रासाउंड सेवा ठप होने से मरीज इधर-उधर भटकने को विवश हुए। पीएमएस संघ की केंद्रीय कार्यकारिणी का चुनाव होने से कुछ चिकित्सक भी ओपीडी में पूरे समय नहीं बैठे, इससे मरीजों को और दिक्कतें हुईं।



पश्चिम बंगाल के एनआरएस मेडिकल कॉलेज में बीते दिनों में चिकित्सकों पर तीमारदारों के हमले के बाद वहां की मुख्यमंत्री के रवैये से क्षुब्ध डॉक्टरों की हड़ताल की आंच सोमवार को यहां भी पहुंची। सोमवार सुबह छह बजे से 24 घंटे तक हड़ताल का निर्णय शीर्ष नेतृत्व ने लिया, जिससे जिले में हाहाकार की स्थिति रही।


आईएमए अध्यक्ष डॉ. एसपी बंसल व सचिव डॉ. निशांत सक्सेना के नेतृत्व में चिकित्सकों ने जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजकर डॉक्टरों को सुरक्षा दिलाने की मांग की। इसके बाद इन्हीं मांगों को लेकर राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज में बैठक कर घटना की निंदा की गई।


वहीं, पीएमएस संघ के अध्यक्ष डॉ. रामकिशोर के नेतृत्व में जिला अस्पताल सहित सभी सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों ने काली पट्टी बांधकर विरोध जताते हुए मरीजों का इलाज किया।


डॉ. निशांत सक्सेना ने बताया कि जिलाधिकारी महोदय की अध्यक्षता में हड़ताल के संबंध में बैठक की गई थी, जिसमें इमरजेंसी सेवाएं संचालित करने और ओपीडी बंद रखने का निर्णय लिया गया था, जिस पर अमल किया गया है।
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जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एके राय ने बताया कि आईएमए की हड़ताल से सोमवार को जिला अस्पताल में मरीजों को भारी भीड़ रही। ओपीडी में मरीजों की संख्या दो हजार तक पहुंच गई। फिलहाल बिना किसी समस्या के इलाज किया गया है।
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