अयोध्या। राममंदिर आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाने वाले श्रीराम जन्मभूमि न्यास के वरिष्ठ सदस्य एवं सुग्रीव किला पीठाधीश्वर ज. गु. रामानुजाचार्य महंत पुरुषोत्तमाचार्य भी अयोध्या में भव्य राममंदिर का निर्माण नहीं देख सके। राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण का उनका सपना अधूरा ही रह गया।
97 वर्ष की अवस्था में शनिवार सुबह 4 बजे उनका साकेतवास हो गया। उनके निधन से संतत्व के एक युग का अवसान हो गया। उनके निधन से रामनगरी के संत-धर्माचार्यों में शोक की लहर दौड़ गई। श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लग गया। रविवार सुबह 10 बजे सरयू तट पर उन्हें अंतिम विदाई दी जाएगी।
महंत पुरुषोत्तमाचार्य जी, ब्रह्मलीन योगी सम्राट देवरहा बाबा के शिष्य तथा सादिक शिष्य पुरूषोत्तम दास के उत्तराधिकारी थे। वे 1972 में सुग्रीव किला महंत बने। इसके बाद जगद्गुरु रामानुजाचार्य के पद पर आसीन होकर संपूर्ण विश्व में सनातन धर्म का प्रचार प्रसार किया। उन्होंने कई धर्मग्रंथों की भी रचना की। संस्कृत के प्रकांड विद्वानों में उनकी गणना होती थी।
उन्होंने संपूर्ण भारत में रामानुज संप्रदाय सहित रामनगरी की गरिमा बढ़ाई, दर्जनों आश्रम संचालित कर सनातन परंपरा को पुष्ट करने का काम किया। उनके शिष्य सुग्रीव किला के उत्तराधिकारी ज.गु. विश्वेशप्रपन्नाचार्य ने बताया कि देवरहा बाबा द्वारा प्रज्वलित अखंड श्रीराम ज्योति प्रज्वलित कर संपूर्ण भारत में भ्रमण कर महाराज श्री सनातन धर्म का प्रचार प्रसार किया। बताया कि रविवार सुबह 10 बजे उनकी अंतिम यात्रा निकालकर सरयू तट पर अंतिम संस्कार किया जाएगा। इससे पूर्व निधन की खबर सुनकर रामनगरी में शोक की लहर दौड़ गई।
रामजन्मभूमि न्यास के वरिष्ठ सदस्य महंत कमलनयन दास, ज. गु. रामदिनेशाचार्य, ज. गु. राघवाचार्य, महंत रामकुमार दास, महंत गिरीशपति त्रिपाठी, गुरूद्वारा ब्रह्मकुंड के मुख्य ग्रंथी ज्ञानी गुरूजीत सिंह, महंत रामदास नाका हनुमानगढ़ी, अधिकारी राजकुमार दास, महंत शशिकांत दास, आचार्य रत्नेश, महंत उद्धव शरण, पार्षद रमेश दास, संत राजूदास, महापौर अयोध्या नगर निगम ऋषिकेश उपाध्याय, नगर विधायक वेद गुप्ता, सखा रामलला त्रिलोकीनाथ पांडेय, भाजपा महानगर अध्यक्ष कमलेश श्रीवास्तव, महामंत्री परमानंद मिश्र, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य अभिषेक मिश्र सहित बड़ी संख्या में शिष्यों ने श्रद्धांजलि अर्पित की।
उधर, सुग्रीव किला के जगतगुरु स्वामी रामानुजाचार्य पुरुषोत्तमाचार्य जी महाराज के निधन पर कमिश्नर मनोज मिश्र और जिलाधिकारी अनुज कुमार ने गहरा दुख प्रकट किया। कमिश्नर ने कहा कि महंत के निधन से हम सभी को गहरा दुख: पहुंचा है। डीएम ने शासन के प्रतिनिधि के रूप में अयोध्या जाकर श्रद्धांजलि अर्पित की। कहा कि महाराज जी के निधन से निश्चित रूप से अयोध्या की अपूरणीय क्षति हुई है।
मुख्यमंत्री योगी का था गहन अनुराग
प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का भी ज. गु. पुरुषोत्तमाचार्य से गहन अनुराग था। वह जब भी अयोध्या आते, महंत जी से आशीर्वाद लेने जरूर पहुंचते थे। दो माह पूर्व ही दीपोत्सव में अयोध्या पहुंचे मुख्यमंत्री योगी ने ज.गु. पुरुषोत्तमाचार्य से मिलकर उनका कुशल क्षेम पूछा था। तब उन्होंने मुख्यमंत्री से कहा था कि जीते जी मंदिर का निर्माण हो जाता तो अच्छा था। राममंदिर आंदोलन में अपने प्राणों का बलिदान देने वाले कारसेवकों की याद में पुराना बस स्टेशन में एक स्मारक भवन व महंत अवैद्यनाथ तथा महंत परमहंस की मूर्ति लगवाने की भी मांग मुख्यमंत्री से की थी।
सदैव किया हिंदुओं का मार्गदर्शन
विहिप के प्रवक्ता शरद शर्मा ने बताया कि वह रामजन्मभूमि न्यास के सदस्य और केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल के भी सदस्य रहे संगठन को उनका आशीर्वाद सदैव प्राप्त होता रहा। अयोध्या में विहिप की स्थापना और 1984 में श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन में उनके मठ और महाराज श्री की केंद्रित भूमिका को नजरंदाज नहीं किया जा सकता। आंदोलन के साथ शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अनुगामी बनकर उन्होंने सदैव हिंदुओं का मार्ग दर्शन किया। सामाजिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक जीवन मूल्यों के प्रति निष्ठावान जीवन हम सभी के लिए प्रेरणादायी बना रहेगा।
विश्व हिंदू परिषद ने व्यक्त की शोक संवेदना
विश्व हिंदू परिषद ने श्रीराम जन्मभूमि न्यास सदस्य एवं केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल के वरिष्ठ सदस्य जगद्गुरु रामानुजाचार्य एवं सुग्रीव किला पीठाधीश्वर पुरुषोत्तमाचार्य के निधन को सामाजिक धार्मिक एवं सांस्कृतिक जीवन मूल्यों की क्षति बताया। श्रीराम जन्मभूमि न्यास अध्यक्ष मणिराम दास छावनी के महंत नृत्यगोपाल दास महाराज ने उन्हें धार्मिक जीवन मूल्यों को संरक्षण प्रदान करने वाला कर्मयोगी बताया। कहा कि पूज्यपाद देवराहा बाबा की छवि उनमें विराजमान थी। विहिप के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय ने कहा कि स्वामी पुरुषोत्तमाचार्य लोक कल्याणकारी तथा सामाजिक उत्थान के प्रति संवेदनशील रहने वाले व्यक्तित्व थे। श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के एक और मार्गदर्शक का अवसान संगठन के लिए क्षति है। विहिप के केंद्रीय सलाहकार समिति के सदस्य पुरुषोत्तम नारायण सिंह ने कहा कि पूज्यपाद महाराज श्री सदैव श्रीराम जन्मभूमि और अयोध्या के धार्मिक संरक्षण संवर्धन के प्रति सजग रहे।
स्वामी रामनुजाचार्य पुरुषोत्तमाचार्य के निधन पर मुख्यमंत्री दुखी
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या के सुग्रीव किला के महंत जगद्गुरु स्वामी रामानुजाचार्य पुरुषोत्तमाचार्य महाराज के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने ब्रह्मलीन स्वामी के शिष्य स्वामी विश्वेशप्रपन्नाचार्य से फोन पर बात कर उन्हें सांत्वना दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वामी पुरुषोत्तमाचार्य के निधन से समाज को अपूरणीय क्षति हुई है। परम विरक्त स्वामी सदैव परमार्थ में लगे रहे । संत सेवा, गौ सेवा, संस्कृत भाषा के उन्नयन तथा विद्यार्थियों की शिक्षा में विशेष रुचि ली। मुख्यमंत्री ने ईश्वर से दिवंगत की आत्मा की शांति की प्रार्थना की।