विवाद की बुनियाद पर होती रही हैं सौहार्द की कोशिशें
अयोध्या। मामले में पहली बार मध्यस्थता की कोशिश नहीं हो रही है। विवाद की बुनियाद पर सौहार्द की कोशिशें कई बार होती रही हैं लेकिन विवाद किसी नतीजे के मुकाम तक नहीं पहुंच सका।
अखाड़ा परिषद के पूर्व अध्यक्ष महंत ज्ञानदास, हाशिम अंसारी से लेकर सेवानिवृत्त जस्टिस पलोक बसु सहित अन्य मामले के समाधान के लिए गंभीर कोशिश कर चुके हैं। हालांकि यह पहली बार है जब कोर्ट की निगरानी में मध्यस्थता की पहल की जाएगी।
मध्यस्थता के लिए गठित किए गए पैनल में शामिल आर्ट ऑफ लिविंग के श्री श्री रविशंकर के नेतृत्व में मामले के समाधान की पहल पहले भी हो चुकी हैं।
नवंबर 2017 को सुलह-समझौते की मुहिम लेकर अयोध्या पहुंचने वाले श्री श्री विवादों में फंस गए थे। निर्मोही अखाड़ा के साथ डील के स्टिंग को लेकर वे चर्चा में रहे।
उनके मुहिम पर उस समय श्रीरामजन्मभूमि न्यास से लेकर संत-धर्माचार्यों ने तल्ख टिप्पणी की थी। पहले पड़ाव से लेकर अंतिम पड़ाव तक उन्हें कोई साथ देता नहीं दिखा था। वे सभी पक्षकारों को एक मंच पर बुलाने में सफल नहीं हो सके थे।
तब उन्होंने कहा था कि किसी फार्मूले के साथ नहीं आया हूं, बल्कि अयोध्या मामले के समाधान के लिए प्लेटफार्म तैयार करने आया हूं। श्री श्री के अतिरिक्त अयोध्या में अन्य कई कोशिशें भी मामले के सुलह-समझौते को लेकर होती रहीं लेकिन हर प्रयास विफल ही रहे।