दीपावली पर आतिशबाजी से बढ़ा डेढ़ गुना प्रदूषण
फैजाबाद। प्रकाश पर्व दीपावली पर जिले भर में जमकर आतिशबाजी व शोर-शराबा हुआ। जिसकी वजह से हवा में घुले जहर ने लोगों को सांस लेना दुश्वार कर दिया है। आतिशबाजी के धूम-धड़ाके ने वायु के साथ ही ध्वनि में भी प्रदूषण की मात्रा को डेढ़ गुना तक बढ़ा दिया है। जिसे सामान्य होने में कुछ समय लगेगा। जांच में ध्वनि प्रदूषण सामान्य रूप से 55 से 60 डेसिबल रहना चाहिए जो 82 डेसिबल मिला।
ध्वनि प्रदूषण का मापन शाम छह बजे से रात 12 बजे तक किया गया। इस दौरान एसपीएम यानि निलंबित धूल के कणों की मात्रा 142 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर दर्ज की गई जबकि स्टैंडर्ड 100 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर है। वहीं, आतिशबाजी के लिए निर्धारित रात दस बजे तक के समय बाद भी लोग पटाखे फोड़ते नजर आए, कही पर किसी तरह की रोका टोकी नहीं की गई।
क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने शहर के नाका क्षेत्र में वायु व ध्वनि प्रदूषण को मापने का उपकरण लगाया था। इसके अलावा शहर के हृदय स्थल कहे जाने वाले चौक, सिविल लाइंस, फतेहगंज, दिल्ली दरवाजा, नियांवा, रिकाबगंज, बल्लाहाता, ऋषिटोला, देवकाली, साहबगंज आदि क्षेत्र ऐसे हैं, जहां पर पटाखेबाजी का चलन शहर के अन्य हिस्सों से ज्यादा रहता है।
यदि इन सभी स्थानों पर भी प्रदूषण मापने की व्यवस्था होती तो आंकड़े कुछ और बता रहे होते। फिर भी जो तस्वीर सामने आई है, वह भी चौंकाने वाली है। पटाखों के लिए अधिकतम 120 डेसिबल की आवाज निर्धारित है लेकिन दिवाली पर एक साथ पटाखे चलने से यह नियम तार-तार हो गया।
शहर के मुख्य इलाकों चौक, देवकाली, बेनीगंज, अमानीगंज, रीडगंज, सिविल लाइंस, रिकाबगंज आदि इलाकों में बुधवार को ज्यों ही शाम ढली और लोग दीवाली के उत्सव में सराबोर हुए, त्यों ही पटाखों की सामूहिक ध्वनि ने आने-जाने वाले ही नहीं घरों में दुबके बुजुर्गों को भी कानों को तेजी से बंद करने को विवश कर दिया। पटाखों की तेज आवाज से ह्रदय रोगी भी परेशान दिखे।
साथ ही पटाखों के धुएं से बढ़ा प्रदूषण अस्थमा रोगियों के लिए भी खतरनाक रहा। फिलहाल गनीमत रही कि पटाखों की कोई अप्रिय घटना जिला अस्पताल प्रशासन के संज्ञान में नहीं आई। हालांकि इक्का-दुक्का मामले गांवों में हुए तो स्थानीय डॉक्टरों तक सिमटकर रह गए। रामनगर स्थित क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार कई साल से दीपावली के मौके पर सर्वे नहीं हुआ है।
इस बार कार्यालय में ही मापक यंत्र लगाकर जांच हुई। जांच में ध्वनि प्रदूषण सामान्य रूप से 55 से 60 डेसिबल रहना चाहिए लेकिन 82 डेसिबल पाया गया। ध्वनि प्रदूषण का मापन शाम छह बजे से रात 12 बजे तक किया गया। इस दौरान एसपीएम यानि निलंबित धूल के कणों की मात्रा 142 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर दर्ज की गई जबकि स्टैंडर्ड 100 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर है। यह मापन बुधवार की सुबह छह बजे से गुरुवार की सुबह छह बजे तक हुआ।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद भी रात दस बजे के बाद देर रात पटाखों के शोर से शहर गूंजता रहा। इसको लेकर पुलिस भी निष्क्रिय नजर आई। वहीं तेज आवाज वाले पटाखों पर प्रतिबंध के बाद भी वह सरेआम बिकते रहे और लोगों ने उसे खरीदा भी। एसपी सिटी अनिल सिंह सिसौदिया ने बताया कि बाजारों में चेकिंग कर तेज आवाज वाले पटाखों की बिक्री पर रोक लगाई गई थी।
शहर के अधिकांश हिस्सों में रात दस बजे के बाद पटाखे जला बंद हो गए थे, कुछ जगहों पर तय समय के बाद हो रही आतिशबाजी पर लोगों को समझाबुझाकर घर भेजा गया। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी स्वामीनाथ राम ने कहा कि रामनगर स्थित कार्यालय में ध्वनि एवं वायु प्रदूषण की माप की गई। दोनों की मात्रा में बढ़ोत्तरी देखी गई है। ध्वनि 55 से 60 डेसिबल होनी चाहिए जो बढ़कर 82 डेसिबल हो गई, जबकि एसपीएम मात्रा 100 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर से तकरीबन डेढ़ गुना बढ़कर 142 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर हो गई।