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सत्यमार्ग के प्रदर्शक और अनुयायी थे संत कबीर: इंद्रेश

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रामनगरी में धूमधाम से मनाई गई कबीर जयंती
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अयोध्या। कबीर मठ जियनपुर अयोध्या में परंपरागत रूप से मनाई जाने वाली कबीर जयंती महोत्सव पर इस बार दोनों गुटाें को मठ परिसर में कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी गई। जिसके बाद परिसर से बाहर दोनों गुटों ने जयंती कार्यक्रम आयोजित किया। उदार साहब गुट की ओर से आयोजित कबीर जयंती महोत्सव को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए आरएसएस प्रचारक इंद्रेश ने कहा कि, प्यार से जीवन है और नफरत से मौत। यही कबीर दर्शन का सार तत्व है। जो लोग खुदा व राम में भेद करते हैं वे प्रत्यक्ष तौर पर शैतान हैं। जो सब में मेल बैठाए, प्यार फैलाए वही सच्चा धार्मिक व कबीरपंथी हो सकता है। कबीर सत्यमार्ग के प्रदर्शक और अनुयायी थे उनका दिखाया हुआ मार्ग उनके चले जाने के बाद भी रोशन है।
विशिष्ट अतिथि अवध विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित ने कहा कि सद्गुरु कबीर की वाणी सद्प्रेरणा देती है, समरसता के पोषक रहे हैं संत कबीर। अतिथियों द्वारा कबीर धारा पत्रिका के नवीनतम अंक का लोकार्पण भी किया गया। अध्यक्षता श्री कबीर धर्म मंदिर सेवा समिति के अध्यक्ष उदार दास, संचालन कोषाध्यक्ष उमाशंकर दास ने किया। समारोह में आरएसएस प्रचारक संत मुरारी दास, राष्ट्रीय मुस्लिम मंच के संयोजक मो. सैय्यद इरफान, धनौती पीठ सीवान से आये आचार्य गुरू प्रसाद गोस्वामी, महंत दिलीप दास त्यागी, किछौछा शरीफ के सैय्यद उस्मान, अधिवक्ता साहिन परवेज, हाईकोर्ट के अधिवक्ता एमबी सिंह, डॉ. दिलीप सिंह, संत शील दास, राधेश्याम त्यागी समेत विभिन्न प्रांतों से आए भक्त मौजूद रहे।
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मानव मात्र को एक सूत्र में पिरोती है कबीर वाणी : परीक्षा साहेब
अयोध्या। कबीर मठ के दूसरे गुट द्वारा आयोजित कबीर जयंती समारोह को संबोधित करते हुए संत परीक्षा साहेब ने कहा कि मानवीय एकता, सामाजिक एवं सांप्रदायिक सद्भाव, विशुद्ध तत्वज्ञान एवं आत्मिक बोध की दिशा में अग्रसर होने के लिए जिन संतों ने हमारा मार्गदर्शन किया उनमें संत शिरोमणि कबीर साहेब सर्वश्रेष्ठ थे। उनकी शाश्वत अमरवाणी मानव मात्र को एक सूत्र में पिरोने वाली है। इससे पूर्व संत श्री सरल साहेब व संत श्री बालक साहेब द्वारा भजनों की प्रस्तुति की गई। संत निहाल साहेब, संत विमल साहेब, सेत टकसार साहेब, संत दीनदयाल साहेब, संत सत्यानंद त्यागी, संत प्रकाश साहेब सहित अन्य ने भी कबीर के जीवन दर्शन पर प्रकाश डाला। धर्मप्रकाश दास, निगम दास द्वारा सभी का स्वागत किया गया। जयंती समारोह में मुक्ति शरण दास, सुलक्षण दास, संत मिलन दास, विवेक शरण दास, सुगम दास, शांति शरण दास, गंगा शरण दास सहित बड़ी संख्या में विभिन्न प्रांतों से आए संत भक्त मौजूद रहे।
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