राम की पैड़ी को संवारने का काम दीपोत्सव तक मुश्किल
अयोध्या। राम की पैड़ी का अविरल जलप्रवाह अभी दूर की कौड़ी है। दीपोत्सव से पूर्व राम की पैड़ी को सजाने संवारने की तैयारी के बीच जलप्रवाह में सुधार संभव नहीं हो सकेगा। सिंचाई विभाग ने साफ किया है कि राम की पैड़ी के अविरल जल प्रवाह के लिए 38 करोड़ के अपग्रेडेशन का कार्य कराने में पैड़ी पर खोदाई व तोड़-फोड़ होगी, इसे पूरा करना दीपोत्सव के पहले संभव नहीं होगा।
अयोध्या पहुंची पर्यटन मंत्री ने बुधवार को ही 15 सितंबर से पूर्व समस्त कार्य पूर्ण करने की सख्त हिदायत दी थी। इसके पहले 12 मई को अयोध्या दौरे पर आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राम की पैड़ी के अपग्रेडेशन प्लान की माडल स्टडी रुड़की से कराने को निर्देशित किया था। जिसके बाद सिंचाई विभाग ने प्लान को माडल स्टडी के लिए रुड़की भेज दिया है और डीपीआर बनाकर शासन को भी भेजी है।
सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता मनोज सिंह ने बताया कि इस बार पैड़ी के जलप्रवाह में कोई चूक न रह जाए इसलिए मुख्यमंत्री के निर्देश पर मॉडल स्टडी के लिए प्लान आईआईटी रुड़की भेजा जा चुका है। शासन को 38 करोड़ के प्रोजेक्ट का डीपीआर भी भेजी गई है। रुड़की से शीघ्र ही अपग्रेडेशन प्लान को हरी झंडी मिलने व शासन से प्रोजेक्ट की अनुमति मिलते ही काम शुरू हो जाएगा। यह सभी काम दीपोत्सव से पूर्व पूर्ण नहीं हो पाएंगे। इतनी जल्दी सरयू के जलप्रवाह में सुधार संभव नहीं है।
पैड़ी के सौंदर्यीकरण का कार्य जोरों पर
दूसरी तरफ राम पैड़ी के सौंदर्यीकरण का कार्य तेजी से शुरू हो चुका है। इस क्रम में पैड़ी के पास के भवनों को एक कलर में रंगने, परिसर में लाइटिंग, पौधरोपण, स्टोन रेंलिग लगाने का काम किया जाना है। लेकिन सवाल यह है कि जब तक पैड़ी का जलप्रवाह अविरल नहीं होगा, पैड़ी की सुंदरता नहीं निखरेगी। 33 वर्षों से रामपैड़ी के जलप्रवाह की अविरलता के लिए करोड़ों खर्च हुए लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। पानी की ड्रेनिंग सुचारु रूप से नहीं हो पाने के कारण, पैड़ी के पानी में सिल्ट, घास व सैवाल जमने लगते हैं, जिससे पैड़ी बदसूरत हो जाती है।
133 करोड़ के प्रोजेक्ट में 90 प्रतिशत काम शुरू ही नहीं
अयोध्या। मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल अयोध्या के पर्यटन विकास के लिए मुख्यमंत्री द्वारा घेाषित 133 करोड़ की योजनाओं का 90 प्रतिशत कार्य अभी तक शुरू ही नहीं हो सका है। कुछ कार्यों का अनुमति ही नहीं मिली है कुछ भूमि की अनुपलब्धता एवं मानचित्र न मिलने से रुके पड़े हैं। डायग्राम, कार्य की तकनीकि अनुमति व भूमि की उपलब्धता न होने के कारण 133 करोड़ के प्रोजेक्ट में से 90 प्रतिशत कार्य अभी शुरू ही नही हो चुके हैं। जबकि दीपोत्सव से पूर्व रामनगरी अयोध्या को सजाने संवारने की तैयारी चल रही है। कार्यदायी संस्था ने विभिन्न विकास कार्यों के लिए टेंडर किया है। संस्था अभिलाषा इंटर प्राइजेज को कार्य की जिम्मेदारी सौंपी गयी है। संस्था के जनरल मैनेजर राजकिशोर सिंह बताते हैं कि कई काम भूमि की अनुपलब्धता, मानचित्र व अनुमति के अभाव में अटके पड़े हैं। जिनकी अनुमति मिल गई है उन पर काम शुरू हो चुका है, बाकि के लिए तकनीकि अनुमति का इंतजार है।