अयोध्या। रामनगरी से चित्रकूट तक मणिरामदास छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास की अगुवाई में गई श्रीभरत यात्रा रविवार को अयोध्या पहुंचकर समाप्त हो गई।
इस दौरान जगह-जगह पर पुष्प वर्षा कर यात्रा का स्वागत किया गया। बीते छह नवंबर को श्रीरामजन्मभूमि न्यास अध्यक्ष व मणिरामदास छावनी के महंत नृत्यगोपाल दास के संयोजन में निकली भरत यात्रा रविवार को शाम चित्रकूट से चलकर प्रयाग, प्रतापगढ़, सुल्तानपुर, नंदीग्राम होते हुए अयोध्या के मणिराम दास छावनी वापस पहुंची।
यात्रा वापसी का स्वागत करते हुए श्रीराम जन्मभूमि न्यास अध्यक्ष और मणिराम दास छावनी के महंत नृत्य गोपाल दास ने कहा कि इतिहास में सबसे प्राचीन एतिहासिक ग्रंथ महर्षि वाल्मीकि रामायण है।
इस धर्मग्रंथ में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम सहित भरत जी के पावन आदर्श जीवन का चरित्र चित्रण है। 45 वर्ष से अयोध्या से चित्रकूट और पुन: अयोध्या वापसी कर समाज को जाग्रत करने वाली श्रीभरत यात्रा अपने उद्देश्यों में सफल हो रही है। यात्रा समापन अवसर पर महंत बजरंग दास, कृपालु रामदास आदि उपस्थित रहे।