अयोध्या। रामनगरी में छठ महोत्सव का उल्लास छाया हुआ है। महोत्सव को लेकर बाजार गुलजार हैं। चार दिवसीय महोत्सव की शुरुआत मंगलवार को नहाय-खाय के साथ हो चुकी है। छठ का मुख्य पर्व गुरुवार को मनाया जाएगा। इस दिन व्रती महिलाएं अस्तांचल सूर्य को अर्घ्य देकर पूजन-अर्चन करेंगी।
सूर्य षष्ठी गुरुवार को पूरे दिन व्रती उपवास रखकर शाम के समय डूबते सूर्य को अर्घ्य देने के लिए पूजा सामग्रियों को लकड़ी के डाले में रखकर घाटों पर पहुंचेंगी और सूर्य को अर्घ्य देने के बाद घर आकर सारा सामान रख देंगी। षष्ठी की रात छठी माता के गीत गाए जाएंगे और व्रत की कथा सुनाई जाती है।
इससे पूर्व बुुधवार को चार दिवसीय छठ महोत्सव के क्रम में दूसरे दिन खरना की विधि पूर्ण की गई। व्रती महिलाओं ने पूरे दिन उपवास रखकर शाम के समय गन्ने का रस या गुड़ में बने चावल की खीर का प्रसाद ग्रहण किया। व्रत के चौथे दिन 27 अक्टूबर को सूर्य निकलने से पहले ही व्रती घाट पर पहुंच जाएंगे और उगते हुए सूर्य की पहली किरण को अर्घ्य दिया जाएगा।
इसके बाद घाट पर ही छठ माता को प्रणाम कर व संतान रक्षा का वर मांग वापस घर लौटकर प्रसाद खाकर व्रत खोलेंगी। श्री सरयू अवध बालक सेवा समिति के तत्वावधान में दो दिवसीय छठ महोत्सव का आयोजन 26 व 27 अक्टूबर को किया गया है।
महोत्सव में भगवान सूर्यनारायण की भव्य झांकी व महाआरती सहित विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम संपन्न होंगे। आयोजक कृष्ण कुमार मिश्र ने बताया कि 27 अक्टूबर की सुबह 6:24 मिनट पर महाआरती की जाएगी। नौ बजे अखंड रामनाम संकीर्तन का समापन व मूर्ति विसर्जन का कार्यक्रम होगा।
समारोह समिति के अध्यक्ष अवध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित के निर्देशन में होगा।