अयोध्या। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय ने रसायन विहीन व मित्र वैक्टीरिया की मदद से फसलों में कीट व रोग प्रबंधन के साथ-साथ पौधों की वृद्धि में मिलने वाले लाभ पर शोध कार्य के लिए केंद्र सरकार के संस्थान सीएसआईआर व एनबीआरआई के साथ अनुबंध किया है।
विश्वविद्यालय के नवागत निदेशक शोध डॉ. एसके शुक्ला ने पदभार ग्रहण करने के दूसरे कार्य दिवस बुधवार को एनबीआरआई में संबंधित परियोजना की मुख्य अन्वेषक व वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आराधना मिश्र के साथ अनुबंध हस्ताक्षर कर शर्तों का आदान-प्रदान किया।
इस परियोजना के कार्यरूप लेने के बाद स्वस्थ भारत अभियान को मजबूत करने में नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के हस्तक्षेप में बढ़ोत्तरी संभव हो सकेगी। निदेशक शोध डॉ. शुक्ला के अनुसार जीवाणुओं व विषाणुओं के कारण देश में तमाम नकदी व परम्परागत फसलें रोग ग्रस्त होकर अपनी उत्पादकता खो बैठती हैं। इससे हमारे किसानों को आर्थिक हानि उठानी पड़ती है।
उन्होंने एक उदाहरण देते हुए बताया कि टमाटर में झुलसा जैसे रोग आ जाने पर प्रति वर्ष 25 से 30 प्रतिशत तक की उत्पादन हानि होती है। ऐसी स्थितियों में किसानों द्वारा झुलसा रोग से उपचार व रोकथाम के लिए भारी मात्रा में रसायनों के उपयोग का प्रतिकूल प्रभाव वातावरण पर तो पड़ता है। साथ में कृषकों को आर्थिक हानि भी उठानी पड़ती है।
यदि इस शोध परियोजना के प्रक्षेत्र परीक्षण से बेहतर परिणाम प्राप्त हुए तो वातावरण प्रदूषण से लेकर उत्पादों की गुणवत्ता तथा जैविक खेती की दिशा में यह अत्यंत महत्वपूर्ण सफलता होगी। अनुबंध होने के अवसर पर विश्वविद्यालय में परियोजना के लिए सहयोगी वैज्ञानिक डॉ. सैयद फजल अब्बास जैदी, डॉ. राजकुमार पाठक व शोध निदेशालय के वैज्ञानिक उपस्थित रहे।