तोगड़िया ने खूब किया पॉलिटिकल ड्रामा, नहीं खोले पत्ते
अयोध्या। अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. प्रवीण भाई तोगड़िया का पॉलिटिकल ड्रामा फुस्स साबित हुआ। 56 घंटे की उनकी अयोध्या यात्रा का कोई निष्कर्ष नहीं निकला। निषेधाज्ञा तोड़ दो बार सरयू तट पर सभा की, समर्थकों के साथ रामकोट की परिक्रमा करने की भी घोषणा की। अतिसंवेदनशील हनुमानगढ़ी बैरियर पर बवाल काटा, फिर भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विकल्प पेश कर नई पार्टी की घोषणा करने का मकसद अधूरा छोड़ चल दिए।
डॉ. तोगड़िया संघर्षशील हिंदू नेता रहे हैं, वे अशोक सिंहल के निधन के बाद विश्व हिंदू परिषद में सबसे ऊंचे कद पर थे। लेकिन प्रधानमंत्री से उनकी नहीं बनी। नतीजा धीरे-धीरे संघ ने भी उनसे नाता तोड़ लिया और विहिप से उन्हें बाहर होना पड़ा। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद का गठन कर पहले विहिप को मात देने के लिए अयोध्या को चुना। यहां उन्हें शुरूआती समर्थन भी मिला।
इसका प्रमाण है सरयू के जल से वजू कर नमाज पढ़ने और राममंदिर के लिए दुआ करने की आरएएस के दिग्गज नेता इंद्रेश की योजना का ऐन वक्त पर ध्वस्त होना। हाल में तपस्वी छावनी के महंत परमहंस के आमरण अनशन के पीछे भी तोगड़िया का गुरुमंत्र जगजाहिर हो चुका है। मगर अचानक नई पार्टी बनाने की तोगड़िया की मंशा के बाद साधु-संत किनारा कसने लगे।
तपस्वी छावनी के महंत परमहंस ने भी साथ छोड़ दिया। वे कहते हैं कि मेरा मकसद राममंदिर निर्माण है, किसी राजनीति पार्टी के लिए नहीं। यही बात यहां के तमाम साधु-संत दोहराते हैं। अब यह सवाल सभी के मन में कौंध रहा है कि क्या तोगड़िया यहां का माहौल खराब करने के लिए बार-बार निषेधाज्ञा तोड़ते रहे।
उनका मकसद पुलिस को भड़काना, गिरफ्तार हो जाना और बगैर पार्टी की घोषणा किए अयोध्या की सीमा से बाहर होना था। शायद प्रशासन ने इसे भांप लिया था। इसीलिए बार-बार मनमानी की कोशिशों के बावजूद उन्हें न गिरफ्तार किया गया न ही जबरन अयोध्या की सीमा से बाहर करने में ही रुचि दिखाई गई।