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आक्रोशित छात्रों ने कुलपति को घेरा, किया प्रदर्शन

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अवध विवि का तुगलकी फरमान बना गले की फांस
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फैजाबाद। अवध विश्वविद्यालय में बीएससी के 80 फीसदी छात्र फेल हो गए। स्नातक के अन्य पाठ्यक्रमों में भी बड़ी संख्या में छात्र फेल हुए है। अब कहा जा रहा है कि यदि किसी छात्र को आपत्ति है तो वह कॉपियों की दोबारा जांच करा सकता है। बशर्ते इसके लिए उसे 33 सौ रुपये निर्धारित शुल्क चुकाना होगा। अब यदि सभी फेल छात्र दोबारा कॉपियां जांचने के लिए आवेदन करते हैं तो विश्वविद्यालय के खाते में करोड़ों रुपये आ जाएंगे। छात्रों का आरोप है कि करोड़ों की कमाई के लिए ही बड़ी संख्या में छात्रों को फेल किया गया है।
उच्चशिक्षा का शायद ही कोई कॉलेज हो, जहां एक प्रश्नपत्र की उत्तर पुस्तिका की स्क्रूटनिंग कराने के लिए 33 सौ रुपये फीस ली जाती हो। दोबारा जांचने की यह फीस परीक्षा शुरू होने से पहले ही परीक्षा समिति ने तय कर कार्य परिषद से मंजूर करा ली थी। अब यही फरमान गले की फांस बन गया है। छात्र सीधा आरोप लगा रहे है कि ज्यादा विद्यार्थियों के फेल होने के पीछे विश्वविद्यालय की करोड़ों-अरबों की कमाई करने की मंशा है। छात्रों के आक्रोश व आलोचनाओं से विश्वविद्यालय प्रशासन बैकफुट पर आ गया है। अब निशुल्क सैंपलिंग पुनर्मूल्यांकन की कही जा रही है।
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अवध विश्वविद्यालय की स्नातक की परीक्षाओं में कुल 03 लाख 31 हजार 159 छात्रों ने भाग लिया था। इनमें से कुल 01 लाख 97 हजार 725 छात्र ही पास हुए। इनमें सबसे ज्यादा बुरी स्थिति बीएससी के छात्रों की रही। बीएससी प्रथम वर्ष में 40442 छात्रों में 17394 (43.01 प्रतिशत), द्वितीय वर्ष में 23358 छात्रों में से 5451 (23.34 प्रतिशत) व तृतीय वर्ष के छात्रों में 34011 छात्रों में से महज 6523 (19.18) छात्र पास हुए। फेल हुए छात्र खराब रिजल्ट का ठीकरा विवि प्रशासन के मत्थे मढ़ रहे हैं। उनका आरोप है कि यदि फेल हुए छात्र एक विषय की उत्तर पुस्तिका देखने के लिए ऑनलाइन 300 व उनका पुनर्मूल्यांकन कराने के लिए 3000 रुपये जमा करता है तो इससे विवि प्रशासन को 44 करोड़ 3 लाख 32 हजार 200 रुपये मिलेंगे। इसके अलावा कोई छात्र एक से ज्यादा कॉपियों का पुनर्मूल्यांकन कराना चाहता है तो फिर 3000 रुपये शुल्क देना होगा।
गुरु वशिष्ठ महाविद्यालय मनकापुर के बीएससी तृतीय वर्ष के छात्र शंकर दयाल का कहना है कि उन्होंने द्वितीय वर्ष में 706/1200 अंक पाए थे जबकि इस वर्ष उन्हें मात्र 166/600 अंक ही मिले। जबकि उनके पेपर अच्छे हुए थे। वह पुनर्मूल्यांकन की फीस जमा करने में असमर्थ हैं।
श्री जगदंबा शरण एजुकेशनल इंस्टीट्यूट गोंडा के बीएससी के छात्र शक्ति मिश्रा कहते हैं कि उन्हें बीएससी द्वितीय वर्ष में 798/1200 अंक मिले थे जबकि इस वर्ष उन्हें 261/600 अंक ही मिले हैं। वह कई विषयों में फेल हो गए हैं रिजल्ट पर विश्वास नहीं हो रहा है।

आरटीआई से तो 50 रुपये में देख सकते कॉपी
आरटीआई के माध्यम से महज 50 रुपये में कॉपी देख सकते हैं। ऐसा यहां कई बार हुआ भी है। खराब रिजल्ट या फेल होने की स्थिति में परीक्षार्थी आरटीआई दाखिल कर उत्तर पुस्तिकाओं को देखते हैं। आवेदन करने पर नियमानुसार 30 दिनों के अंदर कॉपी दिखाना अनिवार्य है।

नकल पर प्रभावी रोक से फेल हुए ज्यादा छात्र : कुलपति
कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित का कहना है कि संबद्ध महाविद्यालयों एवं विवि के कर्मचारियों व अध्यापकों के सहयोग से नकल की परंपरा पर प्रभावी रोक लगाई गई है। इसके साथ-साथ विवि द्वारा मूल्यांकन व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से समस्त उत्तर पुस्तिकाओं की कोडिंग सुनिश्चित करते हुए मूल्यांकन कराया गया है। रही फीस के माध्यम से करोड़ों वसूली की बात तो अब तय हो गया है कि उत्तर-पुस्तिकाओं की सैंपलिंग का पुनर्मूल्यांकन दूसरे विवि के शिक्षकों से कराया जाएगा। गड़बड़ी सामने आई तो शिक्षकों पर कार्रवाई होगी और फेल छात्रों को जनरल मार्किंग कर पास किया जाएगा।

आय बढ़ाने के लिए रचा गया कुचक्र
छात्र नेता शीलेंद्र प्रताप सिंह बताते हैं कि निश्चित रूप से विवि प्रशासन ने अपनी आय बढ़ाने के लिए छात्रों की जेब पर डाका डालने के साथ उनके भविष्य से खिलवाड़ करने का कुचक्र रचा है।

जल्दबाजी में जांची गई कॉपियां
छात्र नेता मीनाक्षी उपाध्याय कहतीं हैं कि इस बार बाहर के शिक्षकों ने ज्यादातर कॉपियां जांची। इन्हें एक दिन में 200 कॉपियां जांचने की दी जाती रही। जिसका खामियाजा छात्र भुगत रहे हैं।

पिछले वर्ष किसी शिक्षक पर नहीं हुई कार्रवाई
पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष गौरव सागर का कहना है कि बीते वर्षों में पुनर्मूल्यांकन में पास होने के बाद जमा कराए गए पैसों में से 500 रुपये काट कर वापस किए गए। एक भी शिक्षक पर कार्रवाई नहीं की गई।

कहां से भरेंगे छात्र इतनी ज्यादा फीस
बहुजन छात्र दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजय आजाद का कहना है कि छात्रों के लिए पुनर्मूल्यांकन की इतनी ज्यादा फीस देना बस से बाहर है। ये विवि प्रशासन को अपने खर्चे पर पुनर्मूल्यांकन कराना चाहिए।

छात्र हितों से हो रहा खिलवाड़
पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष शहनवाज खान व आलोक सिंह का आरोप है कि विवि प्रशासन छात्रों के हितों से खिलवाड़ कर रहा है। आखिर पिछले वर्ष अच्छे अंकों से पास होने वाले छात्र इस वर्ष फेल कैसे हो गए।

आक्रोशित छात्रों ने कुलपति को घेरा, प्रदर्शन
फैजाबाद। अवध विवि के कई कॉलेजों के आक्रोशित छात्रों ने बुधवार को कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित का परिसर में घेराव किया। आरोप लगाए कि बीएससी तृतीय वर्ष में 80 फीसदी छात्रों के फेल होने के पीछे विवि प्रशासन की वसूली की रणनीति है। छात्रों ने इस खराब रिजल्ट के लिए विवि को जिम्मेदार ठहराते हुए जमकर नारेबाजी की। बाद में कुलपति को एक ज्ञापन भी सौंपा। कुलपति व चीफ प्राक्टर ने छात्रों को उचित कार्रवाई करने का आश्वासन देकर शांत कराया। छात्रों के आक्रोश को देखते हुए फोर्स भी बुलानी पड़ी थी।
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साकेत महाविद्यालय पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष शहनवाज खान ने आरोप लगाया कि रिजल्ट जल्द देने के चक्कर में शिक्षकों द्वारा कॉपियों को गलत जांचा गया है। जिससे हजारों छात्रों का भविष्य खराब हो रहा है। बताया कि ज्ञापन के माध्यम से मामले की जांच कराकर उचित कार्रवाई कराने की मांग की है। वहीं विवि में प्रदर्शन की सूचना पर भारी संख्या में पुलिस बल भी मौके पर पहुंच गया, अंत में कुलपति द्वारा ज्ञापन लेने के बाद छात्र शांत हुए। इस दौरान अनूप मिश्र, विशाल सिंह, शिवम पांडेय, नागेश प्रताप सिंह, फैसल खान, जकारिया खान, दिशा मिश्रा व अंजनी अस्थाना समेत अन्य छात्र मौजूद रहे।
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