मंदिर के हिमायती संतों को योगी ने लखनऊ बुलाया
अयोध्या। राममंदिर निर्माण के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चार साल की खामोशी संत-धर्माचार्य व हिंदू संगठनों को खटकने लगी है। काशी में मोदी के बार-बार आने लेकिन, अयोध्या से दूरी बनाए रखने पर संत सवाल उठा रहे हैं। राजनीति के जानकार इसे आने वाले लोकसभा चुनाव से जोड़कर देख रहे हैं। वहीं मंदिर के हिमायती संतों को सीएम ने लखनऊ बुलाया है।
राममंदिर निर्माण में हो रही देरी को लेकर संत-धर्माचार्यों में आक्रोश है। कई हिंदु संगठन भी मोदी सरकार के विरोध में लामबंदी में जुटे हैं। विहिप का 10 दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग भी कारसेवकपुरम में चल रहा है। जहां युवा टोली समेत पुराने संघर्षों में शामिल रहे बुजुर्ग राममंदिर मुद्दे को लेकर तल्ख हैं। हाल के दिनों में श्रीरामजन्म भूमि न्यास व श्री कृष्ण जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के बयान भी मोदी सरकार के प्रति तल्ख हुए हैं।
उधर मुख्यमंत्री के करीबी दिगंबर अखाड़ा के महंत सुरेश दास ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि लोकसभा चुनाव से पहले राममंदिर नहीं बना तो भाजपा की हार तय है। संतों का कहना है कि केंद्र व प्रदेश दोनों जगह भाजपा सरकार है, बावजूद इसके राममंदिर निर्माण में देरी हो रही है जबकि मंदिर निर्माण पार्टी के एजेंडे में है। वहीं राम मंदिर निर्माण में देरी पर संतों के तल्ख रुख से भाजपा परेशान नजर आ रही है।
मुख्यमंत्री संतों से करीबी जाने जाते है, इसलिए अब संतों मनाने का कार्य उन्हें दिया गया है। दिगंबर अखाड़ा के महंत सुरेश दास ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या के संतों से मुलाकात करने के लिए लखनऊ आवास पर गुरुवार सुबह 9 बजे आमंत्रित किया है। इस मुलाकात में रामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के उत्तराधिकारी महंत कमल नयन दास, बड़ाभक्त महल के महंत अवधेश दास, राम बल्लभा कुज्ञ के अधिकारी राजकुमार दास, महंत डॉ. भरत दास समेत अन्य शामिल होंगे।
अब नहीं तो कब बनेगा राममंदिर
रामजी और राममंदिर किसी के अधीन नहीं हैं। मंदिर अब नहीं तो कब बनेगा, योगी और मोदी के काल में राममंदिर का निर्माण प्रारंभ हो जाना चाहिए। इसको लेकर अभी से हम नकारात्मक भाव क्यों लाएं। मोदी-योगी से संत नाराज नहीं हैं। लेकिन जनता और धर्माचार्य चाहते हैं कि राममंदिर का निर्माण इसी सरकार में शुरू हो जाए। समय आ गया है, मोदी व योगी के काल में मंदिर निर्माण शुरू हो जाएगा।- महंत नृत्यगोपाल दास, अध्यक्ष रामजन्मभूमि न्यास
प्रधानमंत्री कर रहे रामलला की उपेक्षा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रामलला की उपेक्षा कर रहे हैं। वे बार-बार काशी जाते हैं, मगर अयोध्या नहीं आते। रामलला ने ही उन्हें सत्ता प्रदान की है, सब कुछ उन्हीं की कृपा से हो रहा है। उन्हें अयोध्या आकर रामलला का दर्शन करना चाहिए। भगवान राम केवल मंदिर बनने से ही खुश हो सकते हैं वरना 2019 के आम चुनाव में भाजपा का जीतना मुश्किल है। भाजपा को हाल के उपचुनावों से भी सबक लेना चाहिए।- आचार्य सत्येंद्र दास, रामजन्मभूमि के मुख्य पुजारी
मोदी काल में ही होगा राममंदिर का निर्माण
राममंदिर मामले की सुप्रीम कोर्ट में नियमित सुनवाई चल रही है मोदी भी लगे हैं। संसद में कानून बनाकर मंदिर निर्माण के सवाल पर बोले कि मोदी संवैधानिक तरह से ही कार्य करेंगे। संविधान का पालन करते हुए ही मंदिर निर्माण होना चाहिए। संत समाज को उम्मीद है कि इसी सरकार में मंदिर निर्माण शुरू हो जाएगा। उन्होंने कहा कि मोदी देश के राजा है, उन्हें अयोध्या आकर रामलला का दर्शन तो करना ही चाहिए।- महंत भरतदास, उदासीन ऋषि आश्रम
दिगबंर अखाड़ा में जल्द संत करेंगे मंदिर पर चर्चा
यदि शीघ्र ही राममंदिर का निर्माण नहीं शुरू हुआ तो साधु समाज आंदोलन की रूपरेखा बनाएगा। तीन चार महीनों में दिगंबर अखाड़ा में साधु-संतों की एक बैठक होगी। जिसमें राममंदिर निर्माण की रणनीति पर चर्चा की जाएगी। अब सिर्फ कहने से काम नहीं चलेगा कर के दिखाना होगा। केंद्र और प्रदेश में दोनों जगह भाजपा सरकार है फिर मंदिर निर्माण में देरी क्यों? - सुरेश दास, महंत, दिगंबर अखाड़ा
साधुओं से नहीं चलती सरकार: इकबाल
मामला सुप्रीम कोर्ट में है, कुछ संत सरकार पर दबाव बना रहे हैं। कोर्ट के माध्यम से फैसला होना है, नियमित सुनवाई भी चल रही है। विधेयक लाकर राममंदिर का निर्माण करना कोर्ट की तौहीन होगी। सुप्रीम कोर्ट का जो निर्णय आएगा उसे मुस्लिम समाज मानेगा। साधुओं से कोई सरकार नहीं चलती, सरकार जनता से चलती है। चंद संत एकत्र होकर कानून बना लेगें? चार साधु नाराज हो जाएंगे तो क्या सरकार झुक जाएगी ऐसी नहीं हो सकता। - इकबाल अंसारी, बाबरी मस्जिद के पक्षकार
सुर्खियां बटोरने को बयानबाजी
हमें राममंदिर बनने में कोई ऐतराज नहीं है लेकिन, अभी मामला कोर्ट में है, सुप्रीम कोर्ट जो निर्णय देगा वह मानेंगे। यदि कानून बनाकर मंदिर निर्माण की बात होती है, तो वक्त आने पर हम जवाब देंगे। कुछ संतों की बयानबाजी सिर्फ मीडिया की सुर्खियां बटोरने के लिए है। इसमें कुछ भी तथ्यपरक नहीं है। अब नियमित सुनवाई से शीघ्र निर्णय आने की उम्मीद बंधी है। लेकिन कुछ लोग मामला लटकाने का प्रयास कर रहे हैं।- हाजी महबूब, बाबरी मस्जिद के पक्षकार
हिंदु संगठनों ने भी राममंदिर निर्माण को लेकर भरी हुंकार
राममंदिर निर्माण में हो रही देरी को लेकर हिंदुवादी संगठनों ने भी हुंकार भरी है। धर्मसेना ने साफ कर दिया है कि यदि शीघ्र मंदिर निर्माण नहीं शुरू हुआ तो 30 अक्तूबर व 2 नवंबर को अयोध्या में कारसेवकों को एकत्र किया जाएगा। वहीं हिंदू समाज पार्टी भी अगस्त में अयोध्या में हिंदू सम्मेलन कर राममंदिर निर्माण संकल्प यात्रा निकालने जा रही है। पार्टी का कहना है कि भाजपा मंदिर निर्माण पर जनता को गुमराह कर रही है। वहीं शिवसेना का कहना है कि कानून बनाकर राममंदिर निर्माण का मार्ग अविलंब प्रशस्त किया जाए नहीं तो चुनाव में जनता भाजपा को मुंहतोड़ जवाब देगी।
ठीक दिशा में चल रहा राममंदिर का प्रयास : विहिप
अयोध्या। विहिप के संपर्क प्रमुख अशोक तिवारी का कहना है कि राममंदिर के प्रयास सही दिशा में चल रहे हैं। मामला सुप्रीम कोर्ट में है, हमें उम्मीद है कि अगले तीन-चार महीनों में सकारात्मक निर्णय आ जाएगा। इसके लिए कानून बनाने की बात न्यायसंगत नहीं है। विहिप के केंद्रीय उपाध्यक्ष हुकुमचंद सांवला ने कहा कि पहले भी न्यायालय ने हमारे हक में फैसला सुनाया है। यह तो तय है कि अयोध्या में मस्जिद नहीं बन सकती है। शीघ्र ही निर्णय आएगा और पूरे 67 एकड़ में भव्य रामममंदिर का निर्माण होगा। विहिप के मीडिया प्रभारी शरद शर्मा ने कहा कि मोदी को अयोध्या आकर रामलला का दर्शन करना चाहिए इससे राममंदिर निर्माण के प्रति लोगों में विश्वास बढ़ेगा।