अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास ने कहा कि तपस्या व्यर्थ नहीं जाती। बड़ा अच्छा संयोग है कि केंद्र में मोदी और प्रदेश में योगी हैं।
सभी धर्माचार्यों को दबाब बनाना होगा कि जल्द संवैधानिक अड़चनों को दूर कर मंदिर निर्माण का रास्ता निकाला जाए। अगर राममंदिर निर्माण अब नहीं हुआ तो कभी नहीं हो पाएगा।
वे बुधवार शाम अयोध्या के कारसेवकपुरम् में आयोजित संत सम्मेलन व धर्मसभा की अध्यक्षता करते बोल रहे थे। महंत नृत्यगोपाल दास ने कहा कि रामजन्मभूमि पर सिर्फ रामलला का मंदिर ही बनेगा।
इसके लिए अड़चनों को दूर करना सरकार का काम है। मुख्य अतिथि विहिप के अन्तरराष्ट्रीय महामंत्री चंपत राय ने कहा कि अयोध्या में भव्य राममंदिर निर्माण हिन्दुस्तान के स्वाभिमान का विषय है।
अयोध्या में सिर्फ मंदिर बनेगा, कोई बंटवारा, लेना-देना या शर्त स्वीकार नहीं है। संसद में कानून बनाकर राममंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त होना चाहिए।
अखिल भारतीय धर्माचार्य संपर्क प्रमुख व धर्मसभा के विशिष्ट अतिथि अशोक तिवारी ने कहा कि राममंदिर हमारी राष्ट्रीय अस्मिता का विषय है।
अवध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर मनोज दीक्षित ने कहा कि अयोध्या में सिर्फ राममंदिर ही बनना चाहिए। मंदिर जल्द बनेगा, इसमें कोई संदेह नहीं।
दिगंबर अखाड़ा के महंत सुरेश दास ने कहा कि अयोध्या में भव्य राममंदिर निर्माण करोड़ों हिंदुओं की आकांक्षा है। रामजन्मभूमि न्यास के सदस्य डॉ. रामविलास दास वेदांती ने कहा कि अयोध्या में मस्जिद स्वीकार नहीं है।
अयोध्या में केवल भव्य राममंदिर का निर्माण होगा। 2018 में राज्यसभा में भी बहुमत हो जाएगा। प्रस्ताव बनाकर मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो। कहा कि सोमनाथ की तर्ज पर अयोध्या में भी भव्य मंदिर का निर्माण होना चाहिए।
सभा का संचालन महंत राममनोज शरण ने किया। सभा को महंत कन्हैयादास रामायणी, महंत सियाशरण, महंत चिन्मयानंद, महंत पवन दास आदि ने भी संबोधित किया।
संत सम्मेलन में महंत डॉ. राघवेशदास वेदांती, महंत भाष्करानंद, ब्रह्मकुंड गुरुद्वारा के चरनजीत सिंह, महंत श्याम सुंदर शरध, महंत अंगद दास, महंत जयरामदास, महंत रामदास, मीडिया प्रभारी विहिप शरद शर्मा सहित अन्य मौजूद रहे।
मुस्लिम निभाएं अपना वचन
चंपत राय ने कहा कि मुस्लिम नेताओं ने 1991 में वचन दिया था कि अगर अयोध्या में रामलला का मंदिर की बात सिद्ध हुई तो हम स्वेच्छा से उस जमीन को मंदिर बनाने के लिए सौंप देंगे।
पुरातत्व विभाग की खोदाई के बाद यह सिद्ध हो गया कि वहां मंदिर था। मंदिर के अवशेष मिले हैं, जो आज भी सुरक्षित हैं। मुस्लिम समाज अपना वादा निभाएं और पीछे हटे।
उन्होंने बताया कि कर्नाटक के उडुप्पी में 24, 25 व 26 नवंबर को धर्मसंसद होने जा रही है। जिसमें पूरे भारत के लगभग 1500 संत-धर्माचार्य शामिल होंगे। धर्म संसद में राममंदिर व निर्माण में आने वाली बाधाओं पर वृहद चर्चा होगी।