अयोध्या। सरयू में मूर्ति विसर्जन न करने के अदालती आदेश के अनुपालन में की गई प्रशासनिक व्यवस्था ध्वस्त हो गई। संत तुलसीदास घाट पर बने सरयू कुंड में प्रतिमा विसर्जित करने की योजना कामयाब नहीं हो सकी।
अधिकतर मूर्तियां सरयू की धारा में ही विसर्जित की गईं। सरयू में चारों ओर पड़े प्रतिमाओं के अवशेष इसकी गवाही दे रहे हैं।
प्रशासन प्रतिमाओं का विसर्जन सरयू कुंड में करा पाने में असफल रहा। अयोध्या सहित पड़ोसी जनपदों से आई मूर्तियों का विसर्जन नदी क ी मुख्य धारा में किया गया।
नवरात्र के समापन के साथ ही मां दुर्गा की प्रतिमाओं क ो पवित्र नदियों के किनारे विसर्जित कर दिया गया लेकिन अब जो तस्वीर नदियों के किनारे देखने को मिल रही है, वह आहत करने वाली है।
अयोध्या में स्थापित 51 दुर्गा पूजा पंडालों के अतिरिक्त पड़ोसी जनपद गोंडा, बस्ती, हरैया, नबाबगंज, पूराबाजार, दर्शननगर से लगभग 750 से अधिक प्रतिमाओं को अयोध्या लाकर सरयू तट के किनारे विसर्जित किया गया।
कुंडो और गड्ढों में विसर्जित की गईं मूर्तियां ऊपर पड़ी हैं, पानी में पड़ा मूर्तियों का पुआल सड़ रहा है। इन्हीं में कलश भी तैर रहे हैं। गंदगी से पटे कुंड और पुआल की सड़न से इन इलाकों में जल और वायु प्रदूषण बढ़ गया है।
नदी के किनारे दुर्गा प्रतिमाओं के अवशेष जमा होने के कारण सरयू नदी के घाट गंदगी से भर गए हैं। केन्द्रीय दुर्गा पूजा समिति अयोध्या के अध्यक्ष रमापति पांडेय का दावा है कि मूर्तियों का विसर्जन सरयू कुंड में किया गया है, पर हकीकत सरयू के किनारे जमा अवशेष बयां कर रहे हैं।