सरयू में बुधवार को नाव पलटने की घटना के बाद मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन के निर्देश पर सरयू में नौकायन पर प्रतिबंध लगा दिया गया। प्रतिबंध के चलते बृहस्पतिवार को नौकायन पूरी तरह से प्रतिबंधित रहा।
प्रशासन ने सरयू घाटों से नावों को हटा दिया गया है। इससे घाटों पर सन्नाटा पसरा रहा, प्रतिदिन के मुकाबले में सरयू तट पर नाममात्र श्रद्धालु नजर आए। सरयू में बुधवार को नाव पलटने से दो श्रद्धालुओं और एक फोटोग्राफर की डूबने से मौत हो गई थी।
इस घटना में चार लोगों को सकुशल बचा लिया गया। इस घटना के बाद एक बार फिर सरयू घाटों पर डूबने से बचाव के इंतजाम न होने का मुद्दा उठा। सरयू में हर वर्ष करीब एक दर्जन लोग समाहित हो जाते हैं।
इस वर्ष भी गत चार महीनों में एक दर्जन से अधिक लोगों की सरयू में डूबकर मौत हो चुकी है, लेकिन इतनी घटनाओं के बाद भी सुरक्षा के प्रति कुछ खास इंतजाम नहीं किए गए हैं। सरयू घाट पर स्थायी जल पुलिस चौकी स्थापित करने की मांग वर्षों से होती आ रही है।
लोगों का कहना है कि सिर्फ नौकायन पर प्रतिबंध लगाने से व्यवस्थाएं नहीं सुधरेंगी। सरयू स्नान को लाखों श्रद्धालुओं हर वर्ष अयोध्या आते हैं, उनकी सुरक्षा के बेहतर इंतजाम करने की आवश्यकता है।
नगर विधायक वेद गुप्ता के अनुसार प्रदेश सरकार शीघ्र ही सरयू घाटों को संसाधनों से लैस करने जा रही है। बताया कि सरयू पुल के दोनों तरफ जाली व जंजीरें लगाई जाएंगी।
स्थायी जल पुलिस चौकी की स्थापना के लिए प्रस्ताव शासन में लंबित है इसे शीघ्र ही पास कराकर व्यवस्थाएं दुरुस्त की जाएंगी। सरयू में प्रतिवर्ष होने वाली डूबने की घटनाओं के लिए स्थानीय नागरिक प्रशासन को जिम्मेदार ठहराते हैं।
विवेक मिश्र कहते हैं कि हर साल सरयू में डूबने की घटनाएं होती हैं, बावजूद इसके प्रशासन द्वारा बचाव के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए जाते हैं। ज्यादातर नाविक नाबलिग और अप्रशिक्षित हैं।
बड़ी संख्या में बिना पंजीकरण के सरयू में चल रहीं नावें भी प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करती हैं। महंत दिलीप दास कहते हैं सरयू में हर साल घटनाएं होती हैं, कई बार तो घटनाओं के बाद उग्र प्रदर्शन तक हुए हैं।
प्रशासन आश्वासन तो देता है लेकिन कार्रवाई सिर्फ कागजों पर ही सीमित होकर रह जाती हैं। नाविक बिना सुरक्षा उपकरण के नाव चलाते हैं और श्रद्धालुओं की जान को खतरे में डालते हैं।