बुढ़वा मंगल आज, उमड़ेंगे श्रद्धालु
अयोध्या। रामनगरी में बुढ़वा मंगल के अवसर पर मंगलवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़ेंगे और सरयू स्नान कर विभिन्न मंदिरों में पूजन-अर्चन करेंगे। इस अवसर पर अयोध्या के मातगैड़ स्थित मतगजेंद्र मंदिर पर मेले का भी प्रतिवर्ष आयोजन किया जाता है। होली पर्व के बाद पड़ने वाले पहले मंगल को बड़ा मंगल (बुढ़वा मंगल) कहा जाता है।
बुढ़वा मंगल के अवसर पर मातगैड़ स्थित मतगजेंद्र मंदिर पर परंपरागत मेले का आयोजन होता है। मतगजेंद्र भगवान को अयोध्या के कोतवाल के रूप में पूजा जाता है। यहां पर लंकापति रावण के भाई और रामभक्त विभीषण के पुत्र बाबा मतगजेंद्र की पूजा-अर्चना होती है। इस मंदिर के बारे में मान्यता है कि भगवान श्रीराम जब लंका पर विजय प्राप्त कर अयोध्या की ओर चले तो भगवान को पहुंचाने के लिए लंका नरेश रावण के भाई विभीषण अपने पूरे परिवार के साथ अयोध्या तक आए थे और चार माह तक अयोध्या में भगवान की सेवा की थी। अयोध्या से जाते समय विभीषण ने अपने पुत्र मतगजेंद्र को भगवान की सेवा के लिए अयोध्या में ही रहने को कहा था। मान्यता है कि मतगजेंद्र व हनुमान जी ने 11 हजार वर्ष तक भगवान श्रीराम की सेवा की। जब भगवान राम अयोध्या छोड़कर जाने लगे तो हनुमान को अयोध्या का राजा और मतगजेंद्र को सुरक्षा के लिए कोतवाल बना दिया। ऐसा माना जाता है कि अयोध्या आने पर मतगजेंद्र के दर्शन बिना फल नहीं मिलता। इस स्थान को विक्रमादित्य ने होली के बाद पड़ने वाले मंगलवार को पुर्नस्थापित किया था, तब से प्रत्येक वर्ष होली बाद पड़ने वाले मंगलवार को यहां मेला भी लगता है।
दंगल में पहलवानों का होगा मुकाबला
अयोध्या। परंपरागत ढंग से प्रतिवर्ष श्याम क्लब अशर्फी भवन चौराहे के निकट बुढ़वा मंगल को होने वाले विराट दंगल का आयोजन इस वर्ष भी मंगलवार को किया गया है। दंगल में वाराणसी, गोरखपुर, जौनपुर, अंबेडकरनगर, गोंडा, हनुमानगढ़ी अयोध्या के नामी-गिरामी पहलवानों का मुकाबला होगा। दंगल का उद्घाटन महापौर ऋषिकेश उपाध्याय करेंगे। जिला कुश्ती संघ के अध्यक्ष घनश्याम दास पहलवान के संयोजकत्व में होने वाले इस विराट दंगल में भाग लेने वाले पहलवानों को उचित पुरस्कार देकर सम्मानित किया जाएगा।