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परिषदीय स्कूलों में बच्चों की सेहत सुधारने दावे फेल

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मासूमों को नहीं मिल रहा फल, दूध देने में भी फर्ज अदायगी
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केस 1- दो माह से फल, दूध व भोजन नहीं
नगर क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय मोदहा में पंजीकृत 50 बच्चों में से बुधवार को 20 उपस्थित रहे। तैनात शिक्षामित्र अर्चना भारती ने बताया कि दो माह से धन न होने की वजह से फल वितरण नहीं हो सका है। यहां सिलेंडर खत्म होने की वजह से मध्याह्न भोजन भी नहीं बन सका। साथ ही बुधवार को बच्चों को दूध भी नहीं मिल सका था।

केस 2- 21 बच्चों के लिए मंगाया दो लीटर दूध
मवई के प्राथमिक विद्यालय पूरे जबरदस्त में पंजीकृत 73 बच्चों में से 34 उपस्थिति रहे। यहां दोपहर 12 बजे तक दूध वितरण नहीं हुआ था। प्रधानाध्यापिका शेमा फातमा ने बताया कि, दूध वाला रास्ते में है। अभी वितरित किया जाएगा। प्राथमिक स्कूल गोड़ियन पुरवा में पंजीकृत 61 बच्चों में से 21 बच्चे मौजूद रहे। प्रधानाध्यापक ने बताया कि दो लीटर दूध मंगाया गया है, जो गर्म होकर अभी बांटा जाएगा। बीईओ अरुण कुमार वर्मा ने बताया कि, दूध वितरण तो है लेकिन धनराशि न होने की वजह से फल वितरण तीन माह से नहीं हो पा रहा है।
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केस 3- तीन माह से धन का संकट, नहीं बंटे फल
प्राथमिक विद्यालय अकवांरा में पंजीकृत 121 बच्चों के सापेक्ष 65 मौजूद रहे। जिन्हें दूध पिलाया गया। पूर्व माध्यमिक विद्यालय अंकवारा में 102 के सापेक्ष 42 बच्चे दूध पीते मिले। लेकिन बच्चों ने बताया कि तीन माह से फल नहीं मिला है। प्रधानाध्यापक अनिल सिंह और रमेश चंद्र मौर्य ने बताया कि दूध का वितरण तो होता है, लेकिन करीब तीन माह से कन्वर्जन कॉस्ट न होने की वजह से फल का वितरण नहीं हो पा रहा है।

फैजाबाद। परिषदीय स्कूलों में बच्चों की सेहत सुधारने के दावे फेल होने के कगार पर हैं। बच्चों को तीन माह से मौसमी फल के दर्शन नहीं हुए। दूध पिलाने की भी फर्ज अदायगी की जा रही है। इन महत्वपूर्ण कार्यक्रमों पर न तो विभाग की नजर है और न ही सरकार से ही इन पर ध्यान दिए जाने की बात बताई जा रही है। बेसिक शिक्षा विभाग तीन माह से फल के लिए बजट नहीं मिलने का रोना रो रहा है।
जिले के 1539 प्राथमिक विद्यालय व 573 जूनियर हाईस्कूलों में पढ़ने वाले करीब एक लाख 89 हजार बच्चों को करीब तीन माह से फल के दर्शन नहीं हुए। इसके अतिरिक्त मध्याह्न भोजन के साथ प्रत्येक बुधवार को बच्चों को मिलने वाले दूध पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। बुधवार को कई स्कूलों में यह कार्यक्रम महज रस्म अदायगी भर रहा। कई स्कूलों में बच्चों को दूध पिलाया ही नहीं गया। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि अप्रैल माह से इस मद में भुगतान नहीं हो रहा है, जिन स्कूलों में बीते सत्र का धन अवशेष था, वहां वितरण होता रहा, लेकिन धन समाप्त होने पर वितरण बंद हो गया।
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अप्रैल माह से फल वितरण के मद में धन का भुगतान नहीं हो सका है। जिनके खाते में धन अवशेष था, उन्होंने यथासंभव वितरण किया। लेकिन करीब तीन माह से पूर्णतया बंद हो गया है। दूध वितरित किया जा रहा है, जहां अनियमितता मिलेगी कार्रवाई की जाएगी।-विनय त्रिपाठी, जिला समन्वयक एमडीएम
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