फैजाबाद। बीते लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा में शामिल हुए जिले के कद्दावर नेताओं में शुमार कांग्रेस व समाजवादी पार्टी से चार बार मंत्री और पांच बार विधायक रहे, सीताराम निषाद का बुधवार की भोर निधन हो गया। वे काफी दिनों से बीमार चल रहे थे।
लखनऊ के लोहिया अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। निधन की सूचना मिलते ही उनके फैजाबाद स्थित आवास पर सुबह से ही श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लगा रहा। इनमें राजनेता, सामाजिक संगठन से लेकर आम लोगों की भारी भीड़ उमड़ी।
पिछले काफी दिनों से वे बीमार थे। उन्हें लखनऊ के लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया। उनका हालचाल लेने के लिए सांसद लल्लू सिंह अस्पताल गए थे। बुधवार भोर उन्होंने अंतिम सांस ली। उसके बाद उनके पार्थिव शरीर को फैजाबाद सिविल लाइन स्थित आवास पर लाया गया।
यहां लोगों के दर्शनार्थ रखा गया था। निधन की खबर पर जिले के जनप्रतिनिधियों के साथ विभिन्न संगठनों, अफसरों के साथ आम लोगों ने पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की। सरयू तट पर अंतिम संस्कार से पूर्व उन्हें सलामी दी गई। इसके बाद सरयू के जमथरा घाट पर अंतिम संस्कार किया गया।
मुखाग्नि उनके पुत्र ने दिया। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी स्व. निषाद के पुत्र को फोन कर शोक जताते हुए परिवार को ढांढस बंधाया।
सियासत में धूम केतु की तरह चमकते रहे निषाद
12 मई 1940 को बीकापुर तहसील क्षेत्र के केशरूआ बुजुर्ग में जन्मे सीताराम निषाद 70 के दशक से जिले की सियासत में धूमकेतु की तरह चमकते रहे। धीर, गंभीर व्यक्तित्व के धनी श्री निषाद ने 70 के दशक में गरीबों, मजदूरों की बात के साथ राजनीतिक पारी की शुरुआत की।
वे बीकेडी से पहली बार बीकापुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक बने। इसके बाद कांग्रेस और समाजवादी पार्टी में रहते हुए चार बार विधायक बने। वे कांग्रेस के बड़े नेताओं और सपा मुखिया मुलायम सिंह के करीबी माने जाते थे। चार बार सूबे की सरकार में मंत्री भी रहे।
नई सदी के आने तक जिले की सियासत में उनका सिक्का चलता रहा। इसके पूर्व उन्होंने कुछ दिनों वकालत भी की थी। श्री निषाद के पांच पुत्रियां और दो बेटों का भरा पूरा परिवार हैं। उनके साथ मंत्री रहने वाले अवधेश प्रसाद कहते हैं कि उनके निधन से गरीबों, दलितों और आम लोगों का सहारा उठ गया। वह जीवन भर गरीबों के लिए लड़ते रहे।
पांच बार बने विधायक
सीताराम निषाद पांच बार विधायक चुने गए। 1974 में वे भारतीय क्रांति दल से विधायक बने। 1980 व 85 में कांग्रेस से विधायक रहे। 1996 व 2002 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव जीत विधायक बने।