अयोध्या। शरद पूर्णिमा महोत्सव बृहस्पतिवार को मनाया जाएगा। शरद पूर्णिमा को रास पूर्णिमा भी कहा जाता है। शरद पूर्णिमा के दिन स्नान, दान व व्रत का अधिक महत्व है।
मान्यता है, इस दिन चंद्रमा की रोशनी औषधीय गुणों से युक्त होती है। यह भी कहा जाता है कि इस दिन अमृत की वर्षा होती है।
इसलिए मध्य रात्रि में चंद्रमा की रोशनी में दूध की खीर रखकर शरद पूर्णिमा पर भोग भी लगाया जाता है और मां लक्ष्मी का पूजन किया जाता है। इस दिन पृथ्वी के सबसे निकट चन्द्रमा होता है।
ज्योतिषगुरु स्वामी हरिदयाल मिश्र ने बताया कि पूर्णिमा तिथि बुधवार को देर रात लग रही है। ऐसे में उदया तिथि गुरुवार को मिलेगी।
इस दिन घाटों पर स्नान-दान के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। रात 12 बजे के बाद तक पूर्णिमा मानी जाएगी। शरद पूर्णिमा की मध्यरात्रि मां लक्ष्मी, इंद्राणी सहित इंद्र और धन के देवता कुबेर की पूजा की जाती है।
मान्यता है कि इस दिन लक्ष्मी मां दीपावली से पूर्व सवारी पर निकलती हैं और जिस घर में सुगंधित वातावरण के बीच धार्मिक आयोजन देखती हैं, वहीं निवास करती हैं।
शरद पूर्णिमा की रात को घरों पर खीर रखने का प्रचलन है। ऐसा करने से चंद्रमा से अमृत की बूंदे भोजन में आ जाती हैं, जिसका सेवन करने से आरोग्यता मिलती है।
दंतधावन कुंड पर सजेगी झांकी
ऐतिहासिक दंत धावन कुंड पर साकेत भूषण समाज के तत्वावधान में हर वर्ष की तरह शरद पूर्णिमा पर श्री क्षीरशायी भगवान की भव्य झांकी सजायी जाएगी।
123 वर्षों से चली आ रही यह परंपरा आज भी कायम है। दंतधावन कुंड में शेषशैय्या पर विराजमान भगवान श्री विष्णुजी की सेवा में रत माता लक्ष्मी, नाभि से निकले कमल पर विराजमान ब्रह्मा जी व वीणा वादन करते हुए देवर्षि नारद की झांकी श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बनती है।
आयोजन प्रभारी सुरेश गुप्ता ने बताया कि शरद पूर्णिमा महोत्सव की तैयारियां पूरी कर ली गई है। दंतधावनकुंड की सफाई, रंगाई-पुताई, सजावट आदि का कार्य पूरा किया जा चुका है।