अयोध्या। ऐतिहासिक गुरुद्वारा ब्रह्मकुंड में गुरुवार को सिखों के नवम गुरू तेगबहादुर जी का 342वां बलिदान दिवस श्रद्धा के साथ मनाया गया।
गुरुद्वारा के मुख्य ग्रंथी ज्ञानी गुरूजीत सिंह ने बताया कि, विक्रमी संवत 1725 में असम से पंजाब जाते समय नवम गुरू तेगबहादुर जी ने अयोध्या के इस गुरुद्वारे में माथा टेका था।
अयोध्या में दो दिन तक अनवरत तप किया था। एक ब्राह्मण को सौंपी गई उनकी चरण पादुका आज भी गुरुद्वारे में श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ रखी हैं।
गुरू तेगबहादुर जी ने इसी स्थान पर 48 घंटे अखंड तप के बाद सत्संग में संगत पाठ करने के लिए कहा था। इस स्थान पर श्री अखंड पाठ साहब के 48 घंटे जाप का बड़ा महत्व है।
गुरुद्वारे में नवम गुरू के बलिदान दिवस के मौके पर विगत सौ दिन से संचालित गुरू ग्रंथ साहब के अखंड पाठ का गुरुवार को समापन व अरदास की गई।
फैजाबाद व लखनऊ से आए रागी जत्थों ने भी अपनी श्रद्धा निवेदित की। इस दौरान लंगर का भी आयोजन किया गया। इस दौरान रामजन्मभूमि के पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास, दिगंबर अखाड़ा के महंत सुरेश दास, डॉ. सुनीता शास्त्री, डीएम डॉ. अनिल पाठक, सतवंत सिंह सेठी, नारायण मिश्र, सरदार महेंद्र सिंह, चरनजीत सिंह आदि मौजूद रहे।