बिजली आपूर्ति बदहाल होने से फसलों की सिंचाई प्रभावित
फैजाबाद। रुदौली व मिल्कीपुर के कुछ इलाकों में गुरुवार को कुछ देर झमाझम बारिश ने राहत जरूर दी, मगर जिले के अधिकांश इलाके सूखे ही रह गए। ऐसे में किसान धान की फसल बचाने को लेकर परेशान हैं। गुरुवार को भी देहात क्षेत्रों में पावर सप्लाई नहीं सुधरी, कहीं पांच घंटे तो कहीं अधिकतम 10 घंटे ही बिजली मिली।
मंडल मुख्यालय पर भी दिन-रात मिलाकर छह घंटे से अधिक कटौती जारी है। लोग धूप व उमस से बहाल नजर आए। जिले में बारिश हुए एक सप्ताह से अधिक समय बीत गया। तेज धूप धान की फसल को जला रही है। किसान कड़ी मेहनत करके जैसे-तैसे सिंचाई कर फसल बचाने की जद्दोजहद कर रहे हैं।
देहात क्षेत्र में कम से कम 12 घंटे भी निर्बाध बिजली मिल जाए तो फसलों की सिंचाई में कोई बाधा नहीं आएगी, मगर पावर कॉर्पोरेशन सिर्फ हवा-हवाई दावे कर रहा है। महाप्रबंधक हर्ष मुंशी ने गुरुवार से पावर सप्लाई सुधरने के दावे किए थे, मगर सुबह से मंडल मुख्यालय पर दिन में दो बार दो-दो घंटे आपात कटौती हो चुकी है।
जबकि बीती रात भी दो घंटे कटौती हुई थी। मौसम का हाल ये है कि रुदौली तहसील क्षेत्र में गुरुवार को बरसात होने पर किसानों को कुछ राहत मिली। कई दिन बाद कुछ पल की बरसात ही सोना साबित हुई। हालांकि जहां इस समय धान को अधिक पानी की जरूरत है, वहीं बारिश नहीं होने के कारण धान की फसल सूखने लगी है।
निर्बाध विद्युत आपूर्ति भी नहीं होने से सिंचाई में बाधा उत्पन्न हो रही है। तहसील मुख्यालय पर ही मात्र चार से पांच घंटे ही बिजली मिलती है। टाउन के जेई जेपी गुप्ता ने बताया कि, जितनी सप्लाई मिल रही उसमे रुदौली उपकेंद्र के सभी फीडर को दी जा रही है। 33 हजार की सप्लाई फेल होने या फिर रोस्टिग के कारण ही सप्लाई नहीं मिल पाती है।
अच्छी बारिश के संकेत नहीं : मौसम विभाग
एनडी विवि के मौसम विभागाध्यक्ष डॉ. अमरनाथ तिवारी ने बताया कि, गुरुवार को मिल्कीपुर व रुदौली के कुछ इलाकों में चंद पल बारिश हुई है। मगर इससे धान की फसल को भीषण गर्मी व धूप के मद्देनजर राहत मिलने के आसार नहीं हैं। फसल को अच्छी बारिश चाहिए, जो नहीं दिख रही है।
छिटपुट बारिश होने के ही संकेत मिल रहे हैं। हाल ये है कि तापमान बढ़ रहा है, गुरुवार को अधिकतम तापमान 34 डिग्री व न्यूनतम 27.5 डिग्री रिकार्ड हुआ, उमस अधिकतम 94 व न्यूनतम 84 रही। मौसम वैज्ञानिक ने कहा कि, इतनी उमस के बाद भी बारिश नहीं होना फसल के लिए काफी नुकसानदेह है।