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मुद्दा- अवध विवि का नहीं हो सका विस्तार, पढ़ाई के लिए पलायन मजबूरी

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अयोध्या। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विवि की स्थापना हुए 44 वर्ष बीत चुके हैं, मगर परिसर में सिर्फ दो हजार छात्रों के ही पढ़ने का इंतजाम हो सका है। इसके चलते हर साल बेहतर उच्च शिक्षा के लिए लखनऊ समेत महानगरों में विद्यार्थियों का जाना मजबूरी होती है। अवध विवि में विस्तार को लेकर न नेताओं की सोच दिखती है न सरकारों की। सिर्फ परास्नातक के कुछ विषयों की कक्षाएं चल रही हैं। अव्यवस्था व संसाधनों की कमी से इनमें भी विद्यार्थियों का टोटा है।
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हाल ही में शुरू किए गए रोजगारपरक कोर्सों में भी विद्यार्थी ढूंढे नहीं मिल रहे है। जबकि अयोध्यावासी अपने विवि के विस्तार के लिए तरस रहे हैं। प्रति वर्ष अयोध्या जनपद से 40 हजार के लगभग विद्यार्थी इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण करते हैं। कहने को जनपद में 123 से अधिक महाविद्यालय हैं। मगर चंद महाविद्यालयों को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश महाविद्यालयों में शिक्षा का स्तर अति न्यून है। न तो सही रूप से शिक्षकों की नियुक्ति है और न संसाधन। इसका खामियाजा अभिभावकों को उठाना पड़ता है।


इंटरमीडिएट के बाद बच्चों की शिक्षा के लिए बड़े महानगरों का मुंह देखना पड़ता है। अवध विवि अपने छात्रों की संख्या पांच लाख बताता फिरता है लेकिन हकीकत यह है कि सिर्फ जनपद के ही 40 हजार विद्यार्थी को गुणवत्तापरक शिक्षा देने में सक्षम नहीं है। हालांकि विवि की स्थापना महाविद्यालय की संबद्धता के लिए हुई थी लेकिन बाद में कैंपस कोर्सों को भी प्रावधान किया गया, लेकिन 44 वर्षों से स्थिति जस की तस है।
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मात्र नौ विभागों के सहारे विवि कैंपस चल रहा है। यहां मात्र दो हजार विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। पिछले कुछ वर्षों में कुछ रोजगारपरक कोर्स अवश्य जुड़े हैं लेकिन इनमें भी विद्यार्थियों का अभाव है। दूसरी ओर विवि में विधिवत स्नातक की कक्षाएं शुरू नहीं हो सकी।


हालांकि पिछले वर्ष बीएससी साइंस विषयों की कक्षाओं को संचालित करना शुरू किया गया है लेकिन इनमें भी विद्यार्थियों का अभाव है। इन तमाम परिस्थितियों के बाद अभिभावक इंटरमीडिएट के बाद अपने बच्चों को दूसरे नगरों में भेजने को मजबूर होते हैं।


अभी तक नहीं है विवि के पास खेल का मैदान
कहने के लिए विवि की बातें काफी लंबी-लंबी होती हैं लेकिन हकीकत इससे कोसों दूर है। 44 वर्ष के अवध विवि में खेल का मैदान नहीं है। विश्वविद्यालयीय प्रतियोगिताएं एवं महाविद्यालयीय प्रतियोगिताएं दूसरे के मैदानों पर निर्भर है। विवि के पास 50 एकड़ से अधिक में फैला पुराना कैंपस, अभी हाल के वर्षों में अवैध कब्जे से मुक्त कराया गया 45 एकड़ का नया कैंपस व लगभग 15 एकड़ से अधिक भूमि पर अभी भी अवैध कब्जा है। पिछले वर्ष विवि ने अपने न्यू कैंपस में स्टेडियम बनाने की घोषणा की है लेकिन अभी यह प्रक्रिया में है।


दो वर्षों में विवि का काफी हुआ विकास
दो वर्षों विवि का काफी विकास हुआ है। 30 के लगभग नए रोजगारपकर कोर्स आए हैं। शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर भी काफी प्रयास किया जा रहा। कोशिश है कि जल्द ही स्नातक की अन्य कक्षाएं भी चलाई जाए।- ओम प्रकाश सिंह, कार्य परिषद सदस्य, अवध विवि


विवि को बदलनी होगी अपनी छवि
अवध विवि ने शुरुआती समय से ही अपनी छवि को धूमिल कर लिया। इसका बहुत हद तक श्रेय कुलपतियों को भी जाता है। मौजूदा दौर गुणवत्तापरक शिक्षा का है। विवि को खुद को नई परिस्थितियों के हिसाब से ढालना होगा।- राजमणि सिंह, छात्र नेता


सभी विषयों की शुरू होनी चाहिए स्नातक कक्षाएं
जिले के छात्रों को गुणवत्ता परक शिक्षा के लिए दूसरे महानगरों का मुंह देखना पड़ रहा है। अगर विवि में स्नातक के सभी विषयों की कक्षाएं शुरू हो जाएं तो अभिभावकों का बोझ कम हो जाएगा। साथ ही विवि को आय के साधन भी उपलब्ध हो जाएंगे।-राजेश सिंह मानव, समाजसेवी


संसद में पर्चा फेंका था तब बना था विवि
विवि की स्थापना बहुत कठिनाईयों से हुई है। हम लोगों ने विवि की स्थापना के लिए संसद में पर्चा तक फेंका, इसके बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने विवि बनाए जाने की घोषणा की। विवि 44 वर्षों में जितना विकसित होना चाहिए था, उतना नहीं हुआ।- राममूर्ति सिंह, समाजसेवी
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