परीक्षा से पूर्व दिमाग को तरोताजा रखें, अच्छी नींद लें
अयोध्या। परीक्षा के दौरान बच्चों को आत्म विश्वास से लबरेज होकर मस्ती व मनोरंजन के साथ तैयारी करनी चाहिए। परीक्षा से पूर्व दिमाग को तरोताजा रखें। अच्छी नींद लें।
अनावश्यक तनाव न लें। परीक्षा कक्ष में सकारात्मक सोच के साथ पहुंचें। ये बातें अमर उजाला की मुहिम अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स के तहत जय गणेश महिला डिग्री कॉलेज देवकाली में बृहस्पतिवार को आयोजित परीक्षा मंत्र में मनो चिकित्सक डॉ. आलोक मनदर्शन ने कहीं।
उन्होंने बताया कि परीक्षा से पूर्व समय रहते अपना कोर्स तैयार कर लें। पूरे पाठ्यक्रम को कम से कम एक बार दोहरा लें। परीक्षा के दिन तक पढ़ते रहने से तनाव और बढ़ता है।
पहले से याद की गई सामग्री पर भी आत्मविश्वास डगमगाने लगता है। परीक्षा के दौरान बिना परिणाम की चिंता किए प्रश्नपत्र हल करना चाहिए। इस दौरान शिक्षिकाओं व छात्राओं ने नारी गरिमा को रखने की शपथ ली।
बीटीसी की छात्रा मानसी विश्वकर्मा ने कहा कि प्रशिक्षण के समय कक्षा में पढ़ाने पर बच्चे कहते हैं आगे बैठने वाले को अच्छे अंक मिलेंगे। इस भावना से कैसे निकला जा सकता है।
आकांक्षा श्रीवास्तव ने कहा कि परिवार में किसी के डांटने से मन में हीन भावना आती है, इस नकारात्मक भाव से कैसे बचा जा सकता है। सौम्या मौर्या ने कहा कि किसी कार्य से पूर्व ही सफलता की चिंता होने लगती है, क्या करें।
काजल मौर्या ने पूछा कि कठिन परिश्रम से तैयारी कर पेपर देने के बाद भी तनाव बरकरार रहता है और रिजल्ट की चिंता होती है। छात्रा अंकिता ने किसी विशेष विषय को पढ़ने का मन होने के बावजूद भी पढ़ने में मन नहीं लगता, क्यों।
रीता गौतम ने पूछा कि वैवाहिक जीवन में प्रवेश करने के बाद छात्रा को किसे प्राथमिकता देनी चाहिए। अंशिका शुक्ला ने पूछा कि परीक्षा को लेकर हमेशा एक तनाव बना रहता है, क्या करें।
मानसी यादव ने किसी विषय की तैयारी के समय एकाग्रता नहीं बन पाती है, क्या करें। श्वेता पांडेय ने पूछा कि जो विषय ज्यादा कठिन होता है, उसे पढ़ने का मन नहीं करता क्या करें। रश्मि मिश्रा ने कहा कि परीक्षा में बैठते ही घबराहट होती है, इससे कैसे बचा जाय।
मनोचिकित्सक डॉ. आलोक मनदर्शन ने जवाब में बच्चों को बताया कि अपनी कमी को दूसरों पर थोपने के लिए अक्सर बच्चे तमाम तरह की बातें करते हैं। छोटे बच्चे अक्सर कम मेच्योरिटी की वजह से कक्षा में आगे या पीछे बैठने को लेकर सवाल उठाते हैं।
परिवार के लोग अच्छे के लिए ही बच्चों को डांटते हैं, उनका सम्मान करने की जरूरत है। छात्रों को हमेशा उभयमुखी होना चाहिए। कहा कि पेपर पैनिक सिंड्रोम से बचने की जरूरत है। बिना परीक्षा के परिणाम की चिंता किए परिश्रम करना चाहिए, सफलता जरूर मिलेगी।
इग्जाम फोबिया दिमाग पर अधिक प्रेशर के कारण होता है। इसे कम करने के लिए मस्ती के साथ पढ़ाई करना चाहिए। बीच-बीच में बोर होने पर संगीत का भी आनंद लेना चाहिए।
कहा कि दिनचर्या के लिए कामों का वर्गीकरण करके प्राथमिकता के आधार पर बैलेंस करना चाहिए। किसी भी विषय में दिक्कत होने पर उससे भागने के बजाय लगाव बढ़ाने की जरूरत है।
विद्यालय के निदेशक प्रमोद यादव ने कहा कि परीक्षा के नाम पर बच्चे घबराएं नहीं, बल्कि स्थित मन से एकाग्रचित होकर पढ़ाई करें। तनाव कम करने के लिए सामान्य दिनों की तरह दिनचर्या बनाएं।
शिक्षिका प्रतिमा शर्मा ने कहा कि बच्चे परीक्षा से पूर्व तनाव को खुद पर हावी नहीं होने दें। नियमित रूप से पढ़ाई आवश्यक है। इससे परीक्षा के समय तनाव नहीं होता।
शिक्षक धनंजय ने कहा कि, सभी छात्रों को अनुशासित होना चाहिए। जीवन में सफलता के उच्च शिखर पर पहुंचाने में इसका भी रोल होता है। पढ़ाई से लेकर जीवन में प्रत्येक पायदान पर गंभीरता जरूरी है।