साधु-संतों ने की रामकोट की परिक्रमा
अयोध्या। श्रीरामजन्मभूमि सेवा समिति के तत्वाधान में संचालित नौ दिवसीय रामलला के प्राकट्य महोत्सव का मंगलवार को भव्य समापन हुआ। इस अवसर पर परंपरागत ढंग से क्षीरेश्वरनाथ मंदिर से हनुमानगढ़ी निशान व रथ पर सवार भगवान श्रीराम, सीता, लक्ष्मण व भगवान शंकर के स्वरूपों से सजी भव्य शोभायात्रा निकाली गई।
इससे पूर्व पूजित कलश को रामजन्मभूमि अधिगृहीत परिसर से वापस लाकर क्षीरेश्वरनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की गई। उत्सव की शुरूआत 31 दिसंबर को कलश पूजन के साथ हुई थी। 6 जनवरी को समिति के पदाधिकारियों ने पूजित कलश रामजन्मभूमि के पुजारी को सौंपा था। मंगलवार को पूजित कलश को वापस लाकर क्षीरेश्वरनाथ मंदिर पर पूजा-अर्चना की गई।
यहां हनुमानगढ़ी के निशान की विधिवत पूजा कर भव्य रथ पर भगवान के स्वरूपों के साथ शोभायात्रा बैंड-बाजे के साथ निकाली गई। समिति के महामंत्री रामप्रसाद मिश्र ने बताया कि समिति 1950 से रामलला का प्राकट्योत्सव मनाती आ रही है। 1992 में विवादित ढांचा ढहाए जाने की घटना के बाद से अधिगृहीत क्षेत्र के समीप स्थित क्षीरेश्वरनाथ मंदिर पर पूजा-अर्चना के साथ प्राकट्योत्सव मनाया जाता है।
कहा कि रामलला करोड़ों हिंदुओं की आस्था के केंद्र है, उनका प्राकट्योत्सव भव्यता पूर्वक मनाने की हमारी मंशा है। समापन उत्सव पर निकली रामकोट की परिक्रमा में शामिल राममंदिर निर्माण के लिए आमरण अनशन कर चुके महंत परमहंस दास ने कहा कि रामलला का प्राकट्योत्सव राममंदिर में मनाया जाना चाहिए।
उन्होंने उम्मीद जताई कि 10 जनवरी से मामले में नियमित सुनवाई शुरू हो जाएगी। इस दौरान महंत रामचरित्र दास, भाजपा नेता शक्ति सिंह, अमल गुप्ता, हरिशंकर सिंह, समिति के संयोजक संजय शुक्ल, डॉ. राकेश मणि, डॉ. राकेशमणि त्रिपाठी सहित अन्य मौजूद रहे।