पटरंगा (अयोध्या)। अयोध्या-बाराबंकी सीमा पर स्थित अशरफपुर गंगरेला वन रेंज अब एक टूरिस्ट क्षेत्र के रूप में विकसित होगा, साथ ही जंगल किनारे स्थित कल्याणी नदी का सौंदर्यीकरण होगा, ताकि पर्यटक इस सुंदर वन के साथ-साथ कल्याणी नदी का भी लुत्फ उठा सके। शनिवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश व एनजीटी के चेयरमैन डीपी सिंह ने रुदौली वन रेंज के अशरफपुर गंगरेला वन का निरीक्षण के बाद ये बातें कही।
डीपी सिंह ने बताया कि यह जंगल अत्यंत सुंदर व घना है, इसका दृश्य अति मनोरम है। इस वन के अंदर वन निगम द्वारा अस्थाई फाइबर के करीब आधा दर्जन काटेज बनवाए गए थे। लेकिन इन मकानों की देखभाल करने वाला कोई नहीं होने से ये वीरान हो गए थे। अब इनकी सफाई करवा कर आसपास फूलों की क्यारी लगवाई जाएगी और बिजली व पानी के साथ-साथ शौचालय की भी व्यवस्था करवाई जाएगी।
बताया कि कल्याणी नदी जिसका उद्गम बाराबंकी जिले से हुआ है, अब उसका सौंदर्यीकरण करा उसके किनारे छायादार व फलदार पौधे लगवाए जाएंगे। बताया कि नदी किनारेे एक सुंदर घाट का निर्माण किया जाएगा, जिसका रास्ता जंगल के अंदर वन काटेज से लेकर कल्याणी घाट तक एक प्राकृतिक मार्ग गुफा की तरह रहेगा। बताया कि कल्याणी नदी के घाट को कतर्नियाघाट की तर्ज पर विकसित किए जाने की योजना है।
मवई जाकर तमसा का भी हाल जाना
एनजीटी चेयरमैन ने मवई क्षेत्र में स्थित तमसा के उद्गम स्थल बसौड़ी पौधशाला सहित मॉडल प्लांटेशन का हाल जाना। उन्होंने डीएफओ को निर्देश देते हुए कहा कि नदी के दोनों और स्थल का चयन कर पौधरोपण कराने की योजना तैयार कर ली जाए, जिससे आगामी वर्षा काल में ही इस पर पौधरोपण किया जा सके।
तमसा को कल्याणी नदी से जोड़ने की मांग
त्रेतायुगीन तमसा का जीर्णोद्धार भले ही मवई ब्लॉक के लखनीपुर के निकट स्थित हनुमान मंदिर से माना जा रहा हो, लेकिन तमसा के पुराने अवशेष बाराबंकी जिले के रामसनेहीघाट के निकट स्थित कल्याणी नदी के पास से मिलते हैं। मवई दौरे पर आए एनजीटी के चेयरमैन से भाजपा मंडल अध्यक्ष निर्मल शर्मा, राजेश शर्मा, उबेद अहमद, शेर बहादुर आदि ग्रामीणों ने तमसा नदी को निरंतर जलमग्न रहने के लिए पुराने बहाव के स्थल से जोड़ने की मांग की। एनजीटी चेयरमैन ने कहा कि इसे शासन के अधिकारियों के समक्ष पेश किया जाएगा।