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साधु-संतों के सहयोग से जलेंगे दीपोत्सव के दीप 16-29-03

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साधु-संतों के सहयोग से जलेंगे दीप
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फैजाबाद। अयोध्या में दूसरे दिव्य दीपावली महोत्सव की तैयारियां चरम पर हैं। शासन से लेकर प्रशासन तक के अधिकारी दीपोत्सव को भव्य बनाने में लगे हैं। दीपोत्सव में दीप खरीदने से लेकर जलाने तक में लगभग 20 लाख रुपये खर्च आना है।

इसका सारा जिम्मा अवध विश्वविद्यालय के पास है, लेकिन दीपों के लिए बजट की कोई व्यवस्था नहीं है। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित के नेतृत्व में अयोध्या के साधु-संतो के सहयोग से दीपोत्सव की गरिमा को चार-चांद लगाने की ठानी है।
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अयोध्या में प्रदेश सरकार के निर्देश पर दूसरा दिव्य दीपोत्सव चार से छह नवंबर तक मनाया जाना है। छह से अधिक देशों की राम लीलाओं सहित एक दर्जन से अधिक कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। इस बार तीन लाख से अधिक दीए जलाए जाने हैं।

पिछले बार की तरह इस बार भी विवि को दीप के संयोजन से लेकर जलाने तक की जिम्मेदारी मिली है। पिछली बार विवि ने सजावट की मद से 17 लाख रुपये खर्च किए थे। इस वर्ष दीपक बढ़ जाने के कारण अनुमानित लागत 20 लाख रुपये से अधिक की है।

विवि प्रशासन ने इस बार अपने मद से पैसा न खर्च करते हुए जन सहयोग का सहारा लिया है। इसमें अयोध्या के साधु-संत बड़ी संख्या में सहयोग कर रहे हैं।

विवि के दीपोत्सव में दीपों के संयोजन से लेकर जलाने तक में खर्च आने वाली अनुमानित धनराशि एकत्रित की जा रही है। अवध विवि के दीपोत्सव प्रभारी आशीष मिश्रा ने बताया कि दीपोत्सव में दीपों के संयोजन से लेकर जलाने तक की जिम्मेदारी अवध विवि की है।

इस बार कुलपति मनोज दीक्षित के नेतृत्व में साधु-संतो के सहयोग से दीप खरीदने से लेकर जलाने तक का खर्चा किया जाएगा। पूरे दीप संबंध आयोजन में 20 लाख रुपये से अधिक की धनराशि खर्च की जानी है।

वहीं अयोध्या में होने वाले दीपोत्सव ने जयसिंहपुर गांव के कुम्हारों की तकदीर बदल दी है। यहां 35 परिवारों दिन-रात दीपक बनाने का कार्य चल रहा है। अब तक एक लाख से अधिक दीपक तैयार हो चुके हैं।

अवध विवि इन गांव से दो लाख दीपक खरीद रहा है। गांव निवासी दीपक सप्लायर विनोद कुमार प्रजापति बताते हैं कि अयोध्या में होने वाला दीपोत्सव गांव की आर्थिक दशा को सुधारने के बड़ा मददगार साबित हो रहा है।

इसके अलावा अन्य 1.5 लाख दीयों को सप्लाई करने का जिम्मा दर्शननगर, पूराबाजार व सोहावल के कुम्हारों का है। सब मिलाकर दीपोत्सव में जिले के कुम्हारों को रोजगार मिला है।

दीपोत्सव में विवि के दृश्य कला विभाग की देखरेख में आयोजित रंगोली प्रतियोगिता के लिए अब तक 600 से अधिक आवेदन आ गए हैं। हालांकि शासन के निर्देश पर सिर्फ 50 की संख्या में ही रंगोली बनाई जाएगी।
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विवि प्रशासन ने एक रंगोली के लिए 10 लोगों की टीम बनाने का निर्णय लिया है। दृश्य कला विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर पल्लवी सोनी बताती हैं कि अब तक दिल्ली से तीन ग्रुप, कोलकाता से एक व अन्य प्रदेशों से भी रंगोली प्रतियोगिता के लिए आवेदन आए हैं।

इसके अलावा लखनऊ, कानपुर, बीएयू, इलाहाबाद और गोरखपुर समेत देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों से भी बड़ी संख्या में आवेदन आ रहे हैं।
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