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भारत-कोरिया के ऐतिहासिक संबंधों का साक्षी बनेगा दीपोत्सव

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भारत-कोरिया के ऐतिहासिक संबंधों का साक्षी बनेगा दीपोत्सव
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अयोध्या। रामनगरी अयोध्या की दिवाली इस बार भव्यता की नजीर होगी। ऐतिहासिक दीपोत्सव को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप प्रदान करने को लेकर शासन-प्रशासन ने तैयारी में जुटा है। इस बार भारत और कोरिया के ऐतिहासिक संबंधों की साक्षी बनने कोरिया के राष्ट्राध्यक्ष की पत्नी समेत 200 सदस्यों का विशेष दल पहुंच रहा है।

विदेशी अतिथि दीपोत्सव का गवाह तो बनेंगे ही, दोनों देशों की सबसे मजबूत कड़ी रानी हो के भव्य स्मारक के विस्तार की आधारशिला भी रखी जाएगी। रामनगरी में यह पहला अवसर होगा, जब किसी आयोजन में बड़ी संख्या में विदेशियों का जमावड़ा हो रहा है। भगवान राम वनवास के बाद जब अयोध्या लौटे थे तो जिस तरह त्रेतायुग में यहां दीपोत्सव मनाया गया था।
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उसी परिकल्पना को साकार करने की पूरी तैयारी तेजी से चल रही है। पूरी नगरी को भव्य रूप से सजाया जाएगा। सरयू घाट दीपों से आलोकित होंगे। साकेत महाविद्यालय से निकलने वाली राम राज्याभिषेक यात्रा में लोक संस्कृति की झलक दिखेगी। रामायण के विभिन्न कांडों पर आधारित झांकियां एक बारगी त्रेताकालीन दृश्य निर्मित करेंगी।

वहीं इस वर्ष दीपोत्सव में कोरिया के राष्ट्राध्यक्ष की पत्नी किम जुंग सू, कोरिया के संस्कृति व पर्यटन मंत्री एचईडी जांग सहित 200 सदस्यीय दल भारत-कोरियो के संबंधों को सुदृढ़ करते नजर आएंगे। इसके अलावा रूस, श्रीलंका, लाओस, इंडोनेशिया, थाईलैंड से करीब 150 कलाकार, चित्रकार अयोध्या की दिवाली को ऐतिहासिक रूप देने के लिए पहुंच रहे हैं।
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दीपोत्सव के आयोजन से जुड़े अयोध्या शोध संस्थान के व्यवस्थापक रामतीरथ बताते हैं कि इस बार अयोध्या की दिवाली नई इबारत लिखेगी। दीपोत्सव में बड़ी संख्या में देशी व विदेशी कलाकार अपना हुनर दिखाएंगे। प्रख्यात कलाकर सुदर्शन पटनायक भी दीपोत्सव का आकर्षण होंगे। पटनायक सरयू तट पर रेत पर भगवान श्रीराम का चित्र बनाएंगे। श्रीलंका, थाईलैंड के भी चित्रकार अपनी कला का नमूना पेश करेंगे।
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