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शादी की तैयारी से ज्यादा लाउडस्पीकर की अनुमति बनीं सांसत

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शादी-विवाह व अन्य धार्मिक कार्यक्रमों लिए अनुमति को लेकर लोग परेशान
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केस एक: बमुश्किल ऐन मौके पर मिली अनुमति
अयोध्या कोतवाली के भीखापुर गांव के निवासी श्रीनाथ तिवारी बताते हैं कि 18 फरवरी के वैवाहिक समारोह के लिए उन्होंने 12 फरवरी को ही रेजिडेंट मजिस्ट्रेट के कार्यालय में संबंधित दस्तावेज जमा करा दिए थे। इन कागजातों पर कोतवाली व सीओ के यहां से वापस रेजिडेंट मजिस्ट्रेट के यहां आख्या पहुंचने में पांच दिन लग गए। इस दौरान उन्होंने करीब एक दर्जन बार कोतवाली के चक्कर लगाए। अंत में बमुश्किल काफी सिफारिशों व जेब ढीली करने के बाद 17 फरवरी की शाम ऐन मौके पर उन्हें अनुमति मिल सकी।

कोस दो: जेब ढीली करने पर मिली अनुमति
अयोध्या नयाघाट निवासी रामप्रसाद पांडेय बताते हैं कि नियमों की झंझट व समय के अभाव में उन्होंने शादी में लाउडस्पीकर की अनुमति के लिए वकील के माध्यम से कागजात जमा कराए। इस दौरान एक बार कोतवाली से आख्या लगवाने के बाद उसे सीओ कार्यालय से ये कहकर वापस कर दिया गया कि इस पर संबंधित चौकी इंचार्ज के हस्ताक्षर की आवश्यकता है। हालांकि अनुमति तो किसी तरह मिल गई लेकिन इस चक्कर में उनका काफी समय बर्बाद हुआ, साथ ही जेब भी ढीली करनी पड़ी।
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फैजाबाद। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर शादी विवाह व अन्य सामाजिक-धार्मिक समारोह में लाउडस्पीकर, डीजे व अन्य ध्वनि विस्तारक यंत्र बजाने के लिए अनुमति लेने का सरकारी आदेश लोगों के लिए गले की फांस बन गया है। नियमों की बाध्यता के चलते जहां लोग परेशान हो रहे हैं। वहीं थाने, चौकियों व सीओ दफ्तर की दौड़ लगाने के साथ जेब भी ढीली करनी पड़ रही है। हाल यह है कि कुछ लोगों के विवाह की डेट भी गुजर गई लेकिन उन्हें परमिशन तक नहीं मिल पाई।
नियमानुसार किसी भी तरह के समारोह में ध्वनि विस्तारक यंत्र बजाने के लिए मजिस्ट्रेट से अनुमति लेना अनिवार्य है। इसके लिए संबंधित मजिस्ट्रेट से आदेश लेने के बाद संबंधित चौकी, थाने व सीओ से लिखित अनुमति लेनी पड़ती है। सभी जगह से अनुमति मिलने के बाद ही मजिस्ट्रेट सिर्फ एक लाउडस्पीकर बजाने की अनुमति देता है। लोग अनुमति पत्र पर साइन कराने के लिए संबंधित चौकी इंचार्ज, थाना प्रभारी व सीओ कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। हाल यह है कि कहीं चौकी इंचार्ज नहीं मिल रहे हैं तो कहीं थाना प्रभारी, कुछ ही घंटों के इस कार्य के लिए लोग हफ्ते भर चक्कर लगा रहे हैं। वहीं कार्यालय के माध्यम से आने वाले कागज को लेकर लोग और परेशान हो रहे हैं। इनमें कहीं थाने की लापरवाही तो कहीं संबंधित कागजात ही गुम हो जाने की शिकायतें आ रही है। हालांकि जरूरतमंद लोग येनकेन प्रकारेण सरकारी मशीनरी को मनाकर अपना काम चला रहे हैं लेकिन काम होने के बाद वह सरकार व प्रशासन को कोसते नजर आ रहे हैं।

आसानी से मिल रही है अनुमति
सीओ अयोध्या राजू कुमार साव कहते हैं कि शादी विवाह व अन्य सामाजिक व धार्मिक कार्यक्रमों के लिए तत्काल अनुमति दी जा रही है। इसके लिए चौकी प्रभारी व प्रभारी निरीक्षक को प्राथमिकता के आधार पर कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं। अनुमति नहीं होने पर प्रयोग किए जाने पर कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
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कैसे बज रहे डीजे व बैंड
अनुमति की आख्या पर संबंधित थाना व कोतवाली से लाल पेन से लिखा जा रहा है कि डीजे बजाने की अनुमति नहीं है। अनुमति के नाम पर सिर्फ एक लाउडस्पीकर बजाने की अनुमति प्रदान की जा रही है। इसके बावजूद शादी विवाहों अन्य धार्मिक कार्यक्रमों में डीजे व बैंड बजाए जा रहे हैं, इनमें दर्जनों की संख्या में साउंड बॉक्स लगे रहते हैं। हालांकि सख्ती के चलते इनके स्वर धीमे जरूर हो गए लेकिन सवाल ये है कि अनुमति नहीं होने के बाद इन पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है।
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