दहेज में बाइक न मिलने पर विवाहिता की गला दबाकर हत्या करने के मामले में अभियुक्त पति व सास-ससुर को दोषी पाते हुए कोर्ट ने दस-दस साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
कोर्ट ने ननद को संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया। प्रत्येक पर 14-14 हजार रुपये जुर्माना भी हुआ है। फैसला अपर जिला जज सोहनलाल श्रीवास्तव की अदालत से हुआ। मामला मवई थाने के गांव लोधन पुरवा मजरे भवानीपुर का है।
रुदौली थाने के सुलेमपुर मजरे मोहामिदपुर निवासी बृजलाल ने अपनी पुत्री नीलम की शादी लोधनपुरवा रामराज के साथ 15 मार्च 2010 को की थी। शादी के बाद ससुराल वाले दहेज में बाइक की मांग करने लगे।
इसके लिए ससुराल वालों ने विवाहिता को प्रताड़ित करके घर से एक बार निकाल दिया। पंचायत के बाद उसे फिर विदा किया गया लेकिन इसके बाद वह वापस नहीं लौटी।
22 मार्च 2012 को नीलम की ससुराल में उसके पति, सास छेदाना व ससुर रामसुमिरन ने गला दबाकर हत्या कर दी और इसे आत्महत्या का रूप देने के लिए शव को फांसी पर लटका दिया था।
घटना की सूचना रामराज के मामा ने बृजलाल को दी। सूचना पर वह नीलम की ससुराल पहुंचा तो छेदाना को छोड़कर अन्य फरार थे।
इसकी रिपोर्ट पति, सास, ससुर, व ननद कलावती के खिलाफ दर्ज कराई गई। सुनवाई के बाद अदालत ने दोषी पाते हुए तीनों अभियुक्तों को सजा सुनाई।