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Etawah News: कविता है अहसासों का संगम और विचारों का उदगम

Tue, 21 Mar 2023 12:35 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
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इटावा। भारत के साहित्य समृद्ध नगरों में से इटावा भी एक है। काव्य के आकाश के कई जगमगाते नक्षत्र जिले ने दिए हैं। कविता में सच गाने के लिए प्राण देने की परंपरा का श्री गणेश करने वाले महाकवि गंग, रीतिकाल के श्रेष्ठ कवि देव, शिशु, बल्लभ से लेकर वर्तमान तक ये परंपरा चली आ रही है। जिले के कुछ युवा कवि इसकी बागडोर संभाले हैं। आज कविता दिवस है। ऐसे में इन कवियों का कहना है कि कविता अहसासों का संगम और विचारों का उदगम है।
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लोगों तक बात पंहुचाने की अभिलाषा ने दिया मंच
सिविल लाइन क्षेत्र में रहने वाले युवा कवि रोहित चौधरी कम उम्र में अलग पहचान बना चुके हैं। वह बड़े मंचों व टीवी चैनलों में भी काव्य पाठ कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि शुरुआत इटावा प्रदर्शनी में होने वाली कविता प्रतियोगिता में देव व शिशु जी के छंद गुनगुनाते हुए हुई। उसके बाद प्रदीप मिश्र व डॉ. कुश चतुर्वेदी के सानिध्य में अक्षर गढ़ना शुरू कर दिया। यह यात्रा जारी है। लोगों तक अपनी बात पंहुचाने की अभिलाषा ने मंच की ओर आकर्षित किया।


भावों को प्रस्तुत करने का माध्यम
सराय दयानत निवासी प्रतीक्षा चौधरी का कहना है कि कविता उनके लिए भावों को सही दिशा प्रदान करने का माध्यम है। यह मूल्यों, संस्कारों, संबंधों व एक अच्छे व्यक्तित्व की शिक्षा देती है। कविता जीवन को आधार देती है। उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है। सकारात्मक रास्तों पर चलने की समझ देती है। बचपन से कविता में रुचि थी। भाई व गुरु से सीख का अवसर मिलता रहा। जब कभी उलझनों में फंस जाती हूं, तब कलम मेरी सहायक बनती है।
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मनोभावों को मिलती अभिव्यक्ति
शहर के छिपैटी निवासी वैभव यादव का कहना है मनोभावों को कलात्मक रूप से शब्दों में अभिव्यक्त करना कविता का शाब्दिक अर्थ है। यह दुनिया समेटे हुए है। इस दुनिया में प्रेम, करुणा, दया, उदारता, सहनशीलता, बड़प्पन आदि अहसासों का संगम है। चांदनी से लेकर रिक्शा चालक के बदन से बहती पसीने की बूंद तक कविता समेटे हुए है। जब से होश संभाला है तबसे कविता को जीता चला आ रहा हूं। मधुशाला की पंक्तियां दिल में उतरने लगीं। नीरज जी के गीत गुनगुनाता हूं।

वाद-विवाद प्रतियोगिता से बना कवि हृदय
एसडी फील्ड निवासी कवि अवनीश त्रिपाठी छह साल से काव्य पाठ करते आ रहे हैं। वह कई राज्यों में कविताएं सुना चुके हैं। उन्होंने कहा कि सोचा ही नहीं था कि कवि बनूंगा। जब पढ़ते थे, तब स्कूलों की ओर से जनपद प्रदर्शनी में वाद-विवाद प्रतियोगिता में भाग लेते थे। उसी दौरान प्रदीप मिश्र व डॉ.कुश चतुर्वेदी ने उनके अंदर छिपे कवि हृदय को पहचाना और माइक पकड़ा दिया। उसके बाद से कविता सुनाने लगे। घर में कवि सम्मेलनों की कैसेट सुनीं जाती थीं।
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