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50 गांवों में घुसा पानी, तीन लाख आबादी पर संकट

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चकरनगर (इटावा)। उफनाई चंबल ने अब तक का रिकार्ड तोड़ दिया है। शुक्रवार को नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 10 मीटर ऊपर पहुंच गया। बीते 24 घंटे में जलस्तर में एक मीटर की बढ़ोतरी हुई। इससे नदी के किनारे बसे 50 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए। 20 गांवों में हालात ज्यादा खराब है। यहां घरों तक में पानी घुस गया है। इससे करीब तीन लाख की आबादी प्रभावित है।
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चंबल में उफान के साथ ही यमुना और क्वारी नदियों में भी बाढ़ की स्थिति बनती जा रही है। फिलहाल यमुना खतरे के निशान 121.90 मीटर से चंद सेंटीमीटर नीचे 121.77 मीटर पर बह रही है। प्रशासन प्रभावित ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रहा है। सैकड़ों लोगों को बाढ़ राहत चौकियों में ठहराया जा गया है। वहीं उनके खाने-पीने की व्यवस्था की जा रही है।
छतों पर बसा ली गृहस्थी, पानी उतरने का इंतजार
गांवों में कुछ लोगों के पक्के मकान हैं। बाढ़ का पानी भरने पर घरों का सारा सामान निकालकर छतों पर सुरक्षित कर लिया है। परिवार सहित खाना पीना वहीं बनाना शुरू कर दिया है। लोगों का कहना है कि इतनी बड़ी गृहस्थी लेकर कहां जाएं। एक-दो दिन इंतजार करेंगे। अगर पानी उतर जाता है तो ठीक नहीं तो गांव छोड़कर कहीं और जाएंगे। इधर, यमुना चंबल और क्वारी नदियों का जलस्तर बढ़ने से लोग परिवार और सामान को सुरक्षित करने में जुटे हुए हैं। बुजुर्ग राधा कृष्ण, रमेश चंद, दीप नारायण, प्रकाश, पर्वत सिंह हरौली कहते हैं कि क्षेत्र में बड़ी आपदा का संकट है।
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बाढ़ प्रभावित गांवों की बिजली भी काटी गई
बाढ़ प्रभावित इलाके की बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई है। इन गांवों में शाम ढलते ही अंधेरा हो जाता है। हरौली के महावीर प्रसाद ने कहा कि बाढ़ ने सब कुछ तबाह कर दिया है। सुखवासी का कहना है कि बाढ़ का पानी देखकर ऐसा लगता है कि अबकी बार नदियां प्रलय लेकर आई हैं। रात को सोए थे तब गांव से काफी दूर था। सुबह जागे तो घरों की दहलीज पर पानी लहरें थीं।
चारों ओर पानी, घड़ियाल और मगरमच्छ का खतरा
तीन दिन से बाढ़ में घिरे लोगों की हिम्मत जवाब देने लगी है। विषैले जंगली जीवों के साथ-साथ मगरमच्छ, घड़ियालों का भी खतरा है। चंबल नदी में संरक्षित घड़ियाल, मगरमच्छ हैं। गांव की गलियों में पानी भरा है। ग्रामीण नरेंद्र सिंह ने बताया कि घड़ियाल, मगरमच्छ पानी भरी गलियों में घूम रहे हैं। जानवरों को रखने की समस्या है। भूसा चारा भी खत्म होने की कगार पर है।
बाढ़ चौकियों में है ठहरने की व्यवस्था
प्रशासन ने मर्दानपुरा, विंडवा खुर्द सिंडोस, बिडौरी, बंसरी, कचहरी, गढ़ाकास्दा, अनेठा, अंदावा, भरेह, कंधेसीघार गांवों के प्राथमिक विद्यालयों में बाढ़ चौकियां बनाई हैं। यहां पर ग्रामीणों को लाया जा रहा है। उनके खाने की भी व्यवस्था की जा रही है।
यमुना नदी से प्रभावित हो रहे 25 गांव
गौहानी, खिरीटी, कछपुरा, नद गंवा, चिंडोली, डिभौली, हरौलीघार, दिलीपनगर, कांयछी, निवी, नौगांवा, पुरावली, इकनौर, विल्हाटी, निवारी, कचहरी, लखनपुरा, घार करावली आदि।
चंबल की बाढ़ में मुसीबत झेल रहे 16 गांव
बंसरी, अचरौली सलोखरा, कतरौली, पथर्रा, बिहार, इमिलिया, चकरपुरा, महुआ सूडा, जगतौली, बरेछा, मिटहटी, कुंदौल, पालीघार, सहसो, भोआ
क्वारी नदी से जुड़े 10 गांव
ललूपुरा, चौरेला, सिंडौस, विंडवा खुर्द, चमराहीतीर, रीतौर, कुवंरपुरा कुर्छा, बिडौरी, बिठौली पसिया गांव बाढ़ से प्रभावित हैं।
चंबल नदी का पानी भरने से 20 गांव बने टापू
भरेह, चकरपुरा, गौहानी, खिरीटी, हरौली, निवी, नौगांवा, कायछी, नीवरी, धरमपुरा अम्दापुर, ककरैया, रनिया, हरपुरा, पुरा मल्हान, खोड़न, गुरुभेली, ललूपुरा, चोरेला, चमराई तीर आदि।
बाढ़ से आंशिक प्रभावित गांव
बिहार, इमिलिया , महुआ सूडा, जगतौली, बरेछा, मिटहटी, कुंदौल, पालीघार, सहसो, भोआ बंसरी राऊनी, भजनपुरा, सिंडौस, विंडवा खुर्द, रीतौर, कुवंरपुरा कुर्छा, बिड़ौरी, बिठौली पसिया, डिंभोली, कछपुरा, कंधेसी 30 से अधिक गांवों में आंशिक रूप से प्रभावित हैं।
एसडीआरएफ पहुंची, शिविर लगाकर बांटा गया खाना
उदी। बढ़पुरा विकास खंड क्षेत्र के मड़ैया पछांयगांव, ग्राम बसवारा, मड़ैया बढ़पुरा गांवों में बाढ़ का पानी चारों ओर भर चुका है। मडै़या पछांयगांव में करीब एक सैकड़ा घरों में पानी भरा है। शुक्रवार को एसडीआरएफ टीम पहुंची। बसवारा गांव की गलियों में बाढ़ का पानी भर चुका है। एसडीएम सदर राजेश कुमार वर्मा ने यहां निरीक्षण किया। शिविर लगाकर खाने का सामान बांटा। ग्राम बसवारा में मोटर वोट से लोगों के आने जाने की व्यवस्था की गई है। (संवाद)
स्वास्थ्य केंद्र की टीम भी नहीं पहुंच सकी गांवों में
बकेवर। यमुना नदी के किनारे तकरीबन आठ से 10 गांवों में खड़ी फसल डूब गई है। दिलीपनगर की मड़ैया, मड़ैया मल्लाहन अंदावा की मड़ैया गांव में लोगों के घरों में पानी भरने लगा है। लवेदी के लखनपुरघार, कछपुरा गांव, मुचाई, बिझायी में भी चारों तरफ से पानी आने के कारण लोग फंस कर रह गए हैं। महेवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की टीम गांवों में नहीं पहुंच सकी है। एडीओ पंचायत श्याम वरन राजपूत ने बताया कि ब्लॉक के आठ गांव बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। गांवों में लाइट कटी होने से जनरेटर की और सोलर लाइटों की व्यवस्था की गई है।
ऊंचे स्थानों पर ली शरण
बकेवर। यमुना के बीहड़ तलहटी में बसे मड़ैया गांव में नीचे के स्थानों पर दस घरों में पानी भर गया गया। ज्ञान सिंह, सुरेश, कृष्णमुरारी, भोलानाथ, काशीराम, बुद्धसिंह, देवा सिंह, दिलीप कुमार, मोहनलाल, सोनपाल घरों को छोड़कर गांव में ही ऊंचे स्थानों पर रहने वाले लोगों के यहां पहुंच गए। परिवार के साथ जरूरी सामान व पशुओं को भी ले गए हैं।

इटावा में बाढ़ ...टकरुपुर घाट के पास यमुना नदी के किनारे बने मन्दिर के आसपास पानी भरा। संवाद- फोटो : ETAWAH

इटावा में बाढ़ ...कछपुरा लखनपुर गांवों के संर्पक मार्ग पर बंद होने की वजह से रुकी स्वास्थ्य विभाग क- फोटो : ETAWAH

इटावा में बाढ़ ...खरीटी गांव बाढ़ के पानी में फसी भैंस को निकालते निकालते ग्रामीण। संवाद- फोटो : ETAWAH

इटावा में बाढ़ ..खरीटी गांव के घरों में पानी भरने पर गृहस्ती का सामान लेकर सुरक्षित स्थानों पर जात?- फोटो : ETAWAH

इटावा में बाढ़ ...नेकराम अपना परिवार सामान लेकर सुरक्षित स्थान की ओर जाता हुआ। संवाद- फोटो : ETAWAH

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