बकेवर में कछपुरा मार्ग पर चढ़ा यमुना का पानी। संवाद
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इटावा/चकरनगर। कोटा बैराज और काली सिंध बांधों से 14 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने से बुधवार को चंबल और यमुना नदी उफना गईं। चंबल खतरे के निशान से 4.94 मीटर, जबकि यमुना 2.98 मीटर ऊपर बह रही है। चंबल का खतरे का निशान 119.80 और यमुना का 121.92 मीटर पर है। चंबल के उफनाने से भरेह संगम के छह गांवों का संपर्क मुख्यालय से कट गया है।
चंबल नदी के आसपास बसे दो दर्जन गांवों में बाढ़ का पानी घुसने लगा है। भयभीत ग्रामीणों ने सुरक्षित जगह पर पलायन करना शुरू कर दिया है। प्रशासन ने एनडीआरएफ और एसडीआरएफ को बुलाया गया है। स्थानीय नाविकों को राहत कार्य के लिए तैनात कर दिया गया है। बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र के सभी स्कूल और कॉलेजों को बंद कर दिया गया है। स्कूलों में बाढ़ राहत चौकियां बनाई गई हैं। आपदा विभाग के अनुसार चंबल का जलस्तर 127 मीटर तक पहुंच सकता है।
हरौली गांव के राम कृष्ण ट्रेक्टर ट्रॉली से अपना सामान लेकर सुरक्षित स्थान पर जाते हुए। संवाद- फोटो : ETAWAH
हरौली गांव में पानी भरने से अपना सामान लेकर रिश्तेदारी में जाते वृद्ध गोविन्द दीक्षित। संवाद- फोटो : ETAWAH
हरौली गांव के रास्ते में भरे पानी से निकलते ग्रामीण। संवाद- फोटो : ETAWAH
भरेह गांव में बाढ़ का पानी घुसने की वजह से घर का सामान सुरक्षित और ले जाते बच्चे। संवाद- फोटो : ETAWAH
क्षतिग्रस्त ढकरा पुलिया का निरीक्षण करते डीएम अवनीश राय। संवाद- फोटो : ETAWAH
हरौली गांव के खेतों में पानी भर जाने से जानवरों को चारा ले जाते किसान। संवाद- फोटो : ETAWAH
हरौली गांव के रास्ते में पानी भरने से गांव जाने को बैठे ग्रामीण। संवाद- फोटो : ETAWAH