इटावा। बैसाखी का पर्व शुक्रवार को मनाया गया। गुरुद्वारा श्री गुरुतेग बहादुर साहिब में शबद कीर्तन किया गया। मुख्य ग्रंथी ने बच्चों का नामकरण कर अमृतपान कराया।
गुरुद्वारा कमेटी के अध्यक्ष सरदार तरनपाल सिंह कालरा ने बताया कि बैसाखी समृद्धि, खुशियों और संकल्प का त्योहार है। आज ही के दिन खालसा पंथ की स्थापना हुई थी। श्री गुरुगोविंद सिंह जी ने बैसाखी के विशाल समागम में कौम के लिए पांच सिखों की परीक्षा ली। पांच सिखों की निष्ठा और समर्पण को देखते हुए उन्हें अमृत छकाया और पांच प्यारे नाम दिया। अमृत छकाना धर्म और देश के खातिर कुर्बानी के लिए तैयार रहने के लिए संकल्प था। गुरुद्वारे में लगे निशान साहिब का झंडा (चोला) बदलने की सेवा और लंगर का आयोजन दीपू अरोड़ा ने किया।
अखंड पाठ साहिब करवाने वाले व लंगर सेवा करवाने वाले रदार दीप सिंह अरोड़ा को सिरोपा भेंट किया गया। गुरुद्वारे में सभी के भले के लिए अरदास की गई। मनदीप सिंह, चरनजीत सिंह, दलजीत सिंह, जसवीर सिंह, गुरमीत सिंह साहनी, त्रिलोचन सिंह मौजूद रहे।