इटावा। रोडवेज की खटारा बसों का संचालन होने की वजह से यात्रियों को काफी जोखिम भरा सफर करना पड़ रहा है। बस कब और कहां खराब हो जाए कुछ पता नहीं। खटारा बस में सफर के दौरान परेशान हुए एक अधिवक्ता ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम में शिकायत की। इस पर आरएम को नोटिस जारी कियाश्या। इसकी सुनवाई चार मई को होगी। हालांकि आरएम ने इस बारे में जानकारी न होने की बात कही है।
बसों में फर्स्ट एड की बात करें तो महज खाली डिब्बा है। ये चालकों के मोबाइल फोन या जरूरत का सामान रखने के काम आ रहा है। अग्निशमन यंत्र इतने पुराने पड़ चुके हैं कि जरूरत पर वह भी दगा दे जाते हैं। ऐसे में फटी और उखड़ी सीटों की बात करना ही बेमानी हो जाएगा।
इटावा डिपो से इस समय 83 बसों का संचालन हो रहा है। इनमें 14 बसें खटारा हैं। इनकी मियाद 10 साल से ऊपर हो चुकी हैं या फिर 11 लाख किलोमीटर चल चुकी हैं। इनके अलावा कई अन्य बसें भी खटारा हो चुकी हैं और अभी भी दौड़ाई जा रहीं हैं। इटावा से रोजाना करीब 10 हजार यात्री सफर करते हैं, लेकिन इन्हें किस तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। बुधवार को बस अड्डे पर खड़ी कुछ बसों में कई खामियां देखने को मिलीं। संविदा चालकों ने बताया कि उन्हें हमेशा खटारा बसें ही पकड़ाईं जातीं हैं। चालक ने बताया कि उसकी बस में एक महीने में चार बार आग लग चुकी है। अग्निशमन यंत्र तक नहीं काम कर सका। बस खराब होने पर ठीक होने में पूरा दिन निकल जाता है।