इटावा। लगभग एक साल बीतने के बावजूद जिले की तीनों डिवीजन में प्रस्तावित तीन उपकेंद्रों के लिए अभी तक प्रशासन जमीन उपलब्ध नहीं करा सका है। ऐसे में इस बार भी गर्मी में लोगों को ओवरलोडिंग से होने वाली ट्रिपिंग की समस्या से जूझ़ना पड़ सकता है।
हर बार गर्मियों में ओवलोडिंग बिजली विभाग के लिए मुसीबत का सबब बनती है। आए दिन ट्रांसफार्मर, तारों और उपकेंद्रों पर फॉल्ट होते हैं। इन्हें सही करने में विभाग के पसीने छूट जाते हैं। वहीं उपभोक्ताओं को भी कई-कई घंटे बिना बिजली के रहना पड़ता है। इससे निजात पाने के लिए बिजली विभाग की ओर से जिले में उपकेंद्र बढ़ाने की योजना बनाई गई थी। विभागीय अधिकारियों की ओर से कुल नौ उपकेंद्र बनवाने के लिए लगभग एक साल पहले प्रस्ताव भेजा गया था। इनमें से शासन ने तीन उपकेंद्रों को ही स्वीकृति दी थी। इनसे करीब 30 हजार की आबादी को लाभ मिलने की उम्मीद है। लगभग एक साल से विभाग की ओर से तीनों डिवीजन में जमीन तलाशी जा रही है, लेकिन अभी तक कोई फाइनल नहीं हो सकी है। जमीन के पेंच में इन उपकेंद्रों के निर्माण का काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है। फिलहाल रीवैम योजना के दूसरे चरण में इस प्रोजेक्ट को शामिल किया गया है। हालांकि अधिकारियों को इस बात की चिंता सता रही है कि यदि समय से जमीन नहीं मिल सकी तो इस बार गर्मियों में फिर से मुसीबत झेलनी पड़ेगी।
तीनों डिवीजन में यहां के लिए प्रस्तावित हैं उपकेंद्र
प्रथम डिवीजन में 33 केवी का उपकेंद्र बनना प्रस्तावित है। इसके लिए लुहन्ना में उपकेंद्र बनाने की योजना है, लेकिन यहां कई जमीन देखने के बावजूद वह फाइनल नहीं हो पा रही है। वहीं द्वितीय डिवीजन में परसूपुरा में 5-5 एमवी के दो ग्रिड का उपकेंद्र बनना है। इसके लिए भी अभी तक जमीन फाइनल नहीं हुई है। वहीं तृतीय डिवीजन के लिए टकपुरा में उपकेंद्र बनने के लिए प्रस्तातिव है। यहां भी 2 *5 का उपकेंद्र बनना है।
जिले के तीनों डिवीजन में एक-एक उपकेंद्र बनना प्रस्तावित है। इसके लिए स्वीकृति मिल चुकी है, लेकिन जमीन नहीं मिल पा रही है। प्रशासनिक अधिकारियों से पत्राचार करके लगातार जमीन दिलाने का आग्रह किया जा रहा है। - संदीप अग्रवाल, अधीक्षण अभियंता