फोटो-39- (फोटो-39)
तीसरे बेटे की भी मौत से रामकली पर टूटा दुखों का पहाड़
25 साल पहले बड़े बेटे की नदी में डूबकर और 20 साल पहले छोटे बेटे की दीवार गिरने से हुई थी मौत
शनिवार रात एक बेटे और उसकी पत्नी ने फंदा लगाकर दे दी जान
संवाद न्यूज एजेंसी
भरथना। 65 साल की रामकली के सामने सोमवार को जब बेटे राजू और बहू शिखा की अर्थी उठी तो उनकी आंखों के सामने एक बाद एक बीते हुए मंजर तैरने लगे। 25 साल पहले बड़े बेटे की नदी में डूबकर, आठ साल पहले पति, 20 साल पहले छोटे बेटे की दीवार गिरने से हुई मौत के बाद रामकली से एक और बेटा छिन गया। मां-बाप की एक साथ लगी चिता को बड़े बेटे विक्रम ने मुखाग्नि दी।
कर्ज में डूबे दासीपुरा गांव निवासी राजू (39) का शनिवार रात को पत्नी शिखा से विवाद हो गया था। इसके बाद शिखा ने कमरे में फंदा लगाकर जान दे दी थी। कुछ देर बाद जब राजू घर पहुंचा और पत्नी को फंदे पर झूलता देखा तो वह घर से चला गया और पिता के अंत्येष्टी स्थल के पास लगे नीम के पेड़ से फंदे के सहारे झूल गया। सुबह दोनों के शव मिले तो गांव का माहौल गमगीन हो गया।
रो-रोकर मां रामकली बस राजू का नाम ले रही थीं। करीब 25 साल पहले सबसे बड़े पुत्र सल्लू की नदी में डूबकर मौत हो चुकी थी। इसके करीब पांच साल बाद सबसे छोटे पुत्र छोटे की घर की दीवार गिरने से मौत हो गई थी। आठ साल पहले पति जगदीश की भी मौत हो गई। इन सब अनहोनियों के बीच रमकली कुछ संभली ही थीं कि रविवार सुबह एक और दुखत घटना हो गई।
राजूपरिवार की जिम्मेदारी उठाए था लेकिन वह भी कर्ज के बोझ तले ऐसा दबा कि उसने भी मां का साथ छोड़ दिया। वहीं, रविवार देर शाम राजू व शिखा की अर्थी घर से एक साथ उठने पर महिलाएं फफक पड़ीं। गांव के बाहर स्थित अंत्येष्टि स्थल पर एक ही चिता पर माता-पिता को 10 साल के बेटे विक्रम ने मुखाग्नि दी। यह मंजर देख हर आंख नम हो गई।