फोटो 24:::::भरथना बस स्टैंड के बाहर जलभराव। संवाद
फोटो 25::::भरथना बस स्टैंड परिरस में गंदगी का ढेर। संवाद
- अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत भरथना और ग्वालियर बस स्टैंड का बदला गया स्थान
- शहर से बाहर दोनों स्टैंडों को बनाने के बाद भी मूलभूत सुविधाएं कराना भूले जिम्मेदार
संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा। जाम की समस्या से शहर को निजात दिलाने के उद्दश्य से पिछले साल चलाए गए अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत शहर में संचालित दो बस स्टैंडों को शहर से बाहर बने स्थानों पर शिफ्ट करया तो गया, लेकिन यहां सुविधाएं आज तक नहीं हो सकीं। न यहां लोगों के धूप से बचने के इंतजाम हैं और न ही शौचालय की कोई व्यवस्था। बैठने के लिए भी कोई व्यवस्था नहीं की गई है। गंदगी से निकलकर लोग यात्रा करने को मजबूर हैं।
तत्कालीन डीएम श्रुति सिंह के आदेश पर गुरु तेग बहादुर पुल के नीचे संचालित भरथना बस स्टैंड और सिंचाई विभाग के गेस्ट हाउस के पास संचालित हो रहे ग्वालियर बस स्टैंड को शहर से बाहर शिफ्ट करया गया था। भरथना बस स्टैंड को भरथना चौराहे के पास अशोक की बगिया में स्थान दे दिया गया था, जबकि ग्वालियर बस स्टैंड के लिए टिक्सी मंदिर के पास पड़ी वन विभाग की जमीन पर स्टैंड बनाया गया।
अधिकारियों ने दोनों ही जगहों पर यात्रियों की समस्याओं को दूर करने के लिए जल्द ही मूलभूत सुविधाओं का इंतजाम कराने का आश्वासन दिया गया था। एक साल बीतने के बाद भी यह बस स्टैंड मूलभूत सुविधाओं के लिए लड़ रहे हैं। भरथना बस स्टैंड पर कच्ची सड़क है। इस बारिश के दिनों में जलभराव हो जाता है।
ऐसे में गंदे पानी से होकर यात्रियों को निकलना पड़ता है। वहीं बैठने के लिए, धूप से बचने के लिए भी कोई शेड आदि की व्यवस्था नहीं है। शौचालय न होने से यात्रियों को खासतौर पर महिला यात्रियों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। इस स्टैंड से भरथना बिधूना के लिए दिनभर में करीब 36 बसें चलती हैं।
इनसे लगभग एक हजार से अधिक यात्रियों का प्रतिदिन आवागमन रहता है। वहीं ग्वालियर बस स्टैंड का भी यही हाल है। यहां पर भी कोई इंतजाम नहीं है। हालांकि ग्वालियर जाने वाली अधिकांश बस सेवाएं चंबल पुल बंद होने की वजह से बंद रही हैं। कुछ ही बसों का सेवाएं सुचारू हैं।
यात्रियों ने बताई परेशानी
फोटो 26-रानी ने बताया कि उनकी भरथना में रिश्तेदारी है। अक्सर उनका आनाजाना रहता है। कभी-कभी बसों का इंतजार करते हैं तो गर्मी में बैठने तक का इंतजाम नहीं मिलने से बहुत परेशानी होती है। सबसे ज्यादा परेशानी शौचालय न होने से परेशानी है।
फोटो 27-राजेश ने बताया कि उनका ट्रांसपोर्ट का व्यवसाय है। कभी-कभी निजी वाहन से न जाकर बस से आना जाना होता है। बस पकड़ने के लिए जाते हैं तो चालक परिचालक भरने का इंतजार करते हैं। गर्मियों के दिनों में बस के अंदर बैठना मुश्किल होता है, लेकिन बाहर कोई इंतजाम न होने से खड़े ही रहते हैं।
वर्जन
स्टैंड को लेकर टेंडर प्रक्रिया कराई जानी है। नगर पालिका चुनाव आ जाने की वजह से टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी थी। जल्द ही प्रक्रिया पूरी कराकर सभी मूलभूत व्यवस्थाएं कराई जाएंगी।