चकरनगर। मां-बाप की सेवा करने से बड़ा कोई धर्म नहीं है। ईश्वर की प्राप्ति का सबसे सुगम और अच्छा मार्ग माता-पिता की सेवा ही है। माता-पिता को तकलीफ पहुंचाने वालों को नरक में भी जगह नहीं मिलती। यह बात चंबल की तलहटी में स्थित ऐतिहासिक सिद्धनाथ मंदिर परिसर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दौरान आचार्य अंकुश जी महाराज ने कही।
उन्होंने कहा कि जब जन्म-जन्म के पुण्य एकत्र होते हैं, तब ही हमें माता-पिता, गुरु और संतों की सेवा करने का मौका मिलता है। मनुष्य के लिए इससे बड़ा कोई पुण्य कर्म नहीं है, जो मनुष्य अपने माता-पिता, गुरु और संतों की सेवा करता है, उसे ईश्वर की शरण मिल जाती है।
उन्होंने कहा कि ईश्वर के अनेक रूप हैं और ईश्वर किस रूप में आएगा, किसी को नहीं पता होता। धर्म के मार्ग पर चलने में मनुष्य को कठिनाइयों का सामना जरूर करना पड़ता है। लेकिन सत्य के मार्ग पर चलने वालों की अंत में जीत अवश्य होती है। हर व्यक्ति को सत्य के मार्ग पर चलते हुए परलोक को सुधारना चाहिए।
इस अवसर पर पधारे परीक्षित रामवीर यादव, आर्यन यादव, पूर्व सांसद प्रेमदास कठेरिया, डॉ राजेश यादव, कमलेश कठेरिया, भरथना चेयरमैन हाकिम सिंह चक, प्रधान चंदगीराम यादव, जिला पंचायत सदस्य राजीव यादव समेत तमाम लोग मौजूद रहे।
सिद्धनाथ मंदिर परिसर में श्रीमद्भागवत कथा सुनतीं महिलाएं। संवाद- फोटो : ETAWAH