जसवतंनगर। तहसील मुख्यालय से करीब 18 किमी दूर घने बीहडों के बीच स्थित ब्रह्माणी देवी के मंदिर का जनपद में ही नहीं बल्कि आसपास के जनपदों में भी खासा महत्व है। साल में दो बार छह-छह महीने में पड़ने वाली नवरात्र पर रोजाना हजारों देवी भक्त जयकारा लगाते हुए माता के दरबार में हाजिरी लगाने पहुंचते हैं।
ब्रह्माणी देवी मंदिर की स्थापना के बारे में किवदंती है कि आगरा जनपद के बाह तहसील के नौगांव के राजा अरिदमन सिंह गंगा स्नान व दर्शन करने जाते थे। सपने में उन्होंने देखा कि जिस स्थान पर स्नान कर रहे हैं, वहां पर खोदाई करें तो ब्रह्माणी देवी की मूर्ति मिलेगी। उसे हाथी पर लेकर अपने राज्य की सीमा में जाएं, लेकिन जहां हाथी बैठ जाए वहीं पर देवी का मंदिर बनवा दें।
राजा ने उस स्थान पर खोदाई कराई तो जमीन से ब्रह्माणी देवी की मूर्ति निकली। मूर्ति लेकर हाथी जब राजा के राज्य की ओर चला तो वह रास्ते में जिस स्थान पर बैठा वह स्थान यमुना किनारे स्थित गांव जाखन है, वहां पर उन्होंने देवी मां का मंदिर बनवाया। इस वजह से नाम पड़ा ब्रह्माणी देवी मंदिर। नवरात्र की अष्टमी और नवमी पर यहां लगने वाले मेले में इटावा, भिंड, ग्यालियर, मुरैना, बाह, फिरोजाबाद, मैनपुरी, फर्रुखाबाद आदि जनपदों से भी देवी भक्त आते हैं। इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, पश्चिमी बंगाल आदि से भी देवी भक्त आते हैैं।