इटावा। फरवरी में ही पारा 30 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया है। हाल ये है कि लोगों ने अभी से पंखे चलाने शुरू कर दिए हैं। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मार्च में अधिकतम तापमान 40 डिग्री तक पहुंचने की आशंका है। किसान गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचने से परेशान हैं।
शनिवार को अधिकतम तापमान 30 और न्यूनतम 14 डिग्री सेल्सियस रहा। पूरे दिन तेज धूप रहने और हवाओं के थम जाने की वजह से लोगों के पसीना निकल आया। दोपहर में बाहर निकले लोग गन्ने का रस पीते नजर आए। वहीं पारे के चढ़ने से गेहूं की फसल पीली पड़ने लगी है। किसान हल्की सिंचाई के जरिए खेत में नमी बनाए रखने का प्रयास कर रहे हैं।
बढ़ता तापमान किसी फसल के लिए अनुकूल नहीं
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. विजय बहादुर जायसवाल का कहना है कि बढ़ता तापमान किसी भी फसल के लिए अनुकूल नहीं है। कहा कि गेहूं की फसल में फूल नहीं आए हैं। एक सप्ताह के अंदर हल्की सिंचाई करें। सरसों में भी ऐसा उपाय करें। गेहूं के लिए अधिकतम तापमान 22 से 24 डिग्री होना चाहिए। लेकिन इस समय अधिकतम तापमान 30 डिग्री जा पहुंचा जो उम्मीद से कहीं ज्यादा है। बढ़ता तापमान चना, मटर और सब्जियों के लिए भी ठीक नहीं है। इन्हें बचाने के लिए खेत में एनपीके की दो ग्राम दवा का एक लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।
ठंडी चीजों के सेवन से बचें
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. अजय शर्मा ने कहा कि लोगों को इस समय विशेष ध्यान रखना है। ठंडी चीजों का सेवन करने से बचें। मौसम में होने वाला उतार चढ़ाव जरा सी लापरवाही होने पर बीमार कर सकता है। ऐसे में सावधानी बरतना बहुत जरूरी है। पंखा चलाने से भी बचें।