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Etawah News: भाजपा का जिलाध्यक्ष बदले जाने की अटकलें तेज

Mon, 17 Jul 2023 12:16 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
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फोटो संख्या 10 भाजपा कार्यालय। संवाद
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ब्राह्मण या वैश्य समाज से जिलाध्यक्ष बनने की संभावना
संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा। भाजपा पर्यवेक्षक शंकर लाल लोधी के इटावा दौरे पर आने के बाद जिस तरह से पार्टी नेताओं ने उनसे भेंट की, उससे पार्टी का जिलाध्यक्ष बदले जाने की अटकलें तेज हो गईं। दो दिन इटावा में रुकने के दौरान पर्यवेक्षक भाजपा नेताओं से राय लेकर लौट चुके हैं। उनके जाते ही जिलाध्यक्ष बनने की दौड़ में कई दावेदार शामिल हाे गए हैं। जिसमें कई पूर्व जिलाध्यक्ष भी शामिल हैं।
जातिगत आंकड़ों की बात करें तो इस दौड़ में ब्राह़्मण, वैश्य, पिछड़े व क्षत्रिय समाज से कई दावेदार जिलाध्यक्ष बनने की दौड़ में शामिल हैं। खास बात यह है कि इनमें चार पूर्व जिलाध्यक्ष भी फिर जिलाध्यक्ष बनने के लिए ताल ठोंक रहे हैं। इसके अलावा वर्तमान जिला कार्यकारिणी के कई पदाधिकारी भी जिलाध्यक्ष बनने की दौड़ में शामिल हैं।
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सूत्रों के अनुसार भाजपा आगामी लोकसभा चुनाव को ध्यान में ऐसा जिलाध्यक्ष तलाश रही है जो उसकी उम्मीदों पर खरा उतरने के अलावा सभी को साथ लेकर चलने वाला और खुद की काबिलियत रखने वाला हो। जिससे लोकसभा चुनाव के दौरान किसी तरह की समस्याओं से न जूझना पड़े। सूत्रों की माने तो ब्राह्मण और वैश्य के किसी नेता को जिलाध्यक्ष की कमान सौपने की संभावना है। ऐसे में ब्राह्मणों की ओर से दावेदारों की संख्या अन्य समाज की अपेक्षा अधिक है। लेकिन इनमें दो पूर्व जिलाध्यक्ष भी शामिल हैं। इनमें राम कुमार चौधरी, शिवमहेश दुबे के अलावा प्रशांत राव चौबे, अशोक चौबे, जिला महामंत्री शिवाकांत चौधरी, प्रमोद शर्मा आदि जिलाध्यक्ष बनने की दौड़ में शामिल हैं।
बात वैश्य समाज की करें तो जिला महामंत्री अन्नू गुप्ता, जिला उपाध्यक्ष विक्रम अग्रवाल, अवनीश वर्मा, पिछड़ा वर्ग से पूर्व जिलाध्यक्ष शिव प्रताप राजपूत, जनक सिंह राजपूत, रमेश राजपूत, वीरेंद्र सिंह बघेल के नाम शामिल हैं। जबकि क्षत्रिय समाज से पूर्व जिलाध्यक्ष अजय धाकरे, विमल भदौरिया,विवेक भदौरिया, विकास भदौरिया, जिला कोषाध्यक्ष संजीव भदौरिया भी जिलाध्यक्ष बनने के लिए ताल ठोंक रहे हैं।
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सूत्रों की माने तो भाजपा यह मौका वैश्य समाज को देने की संभावना भी नजर आ रही है। इसकी एक वजह निकाय चुनाव में इटावा, लखना और बकेवर में अध्यक्ष पद के तीनों प्रत्याशी ब्राह्मण थे। लेकिन इनमें से लखना और इटावा में वैश्य समाज का अध्यक्ष बना। ऐसे में भाजपा को डर है कि कहीं उसका परंपरागत वैश्य वोट न खिसक जाए। वैश्य समाज का रुझान किसी ओर न हो जाए लिहाजा उसे साधने के लिए भाजपा इस बार वैश्य समाज के किसी नेता को भी जिलाध्यक्ष बना सकती है। पूर्व में वैश्य समाज से लक्ष्मण स्वरूप अग्रवाल को ही यह अवसर मिला है उनके जिलाध्यक्ष रहते भाजपा को लोकसभा चुनाव में इटावा से जीत मिली थी। सूत्रों के अनुसार पर्यवेक्षक ने भाजपा के मंडल अध्यक्षों से किसी तरह की कोई राय नहीं ली। कहा कि उन्हें राय देने का कोई अधिकार नहीं है।
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