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सोशल मीडिया बना युवाओं की पढ़ाई में बेहतर मददगार द्घद्घद्घ

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निवाड़ीकला। सोशल मीडिया युवाओं की पढ़ाई में मददगार साबित हो रहा है। युवाओं की मानें तो हर तरह की पढ़ाई के साथ रोजगार पाने में सोशल मीडिया की मदद ले रहे हैं। कोरोना संक्रमण के बाद सोशल मीडिया लोगों के जीवन में काफी अहम रोल अदा कर रहा है।
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अब प्रतियोगी छात्र- छात्राएं किसी कोचिंग संस्थान में जाने के बजाय घर पर ही ऑनलाइन पढ़ाई करने में जुटे हैं। इससे उनके समय और धन दोनों की बचत होती है। कई युवाओं ने सोशल मीडिया के माध्यम से पढ़ाई कर प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल की है। सोशल मीडिया से पढ़ाई के कारण ऑफलाइन कोचिंग संस्थानों को झटका लगा है।
छात्र बोले, घर पर सुविधा तो बाहर क्यों जाएं
देवेंद्र कुमार की मानें तो उन्होंने बीटीसी करने के बाद टेट समेत अन्य परीक्षाओं की तैयारी सोशल मीडिया से करके सभी परीक्षाओं में अच्छे अंक प्राप्त किए। जब घर पर ही मोबाइल से पढ़ाई संभव है तो तो फिर किसी दूसरे शहर में क्यों जाएं।
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इंटर के छात्र हिमांशु प्रजापति ने बताया हाईस्कूल और इंटर के लिए ऑनलाइन कोई विकल्प नहीं है। ऐसे में ऑफलाइन ही पढ़ाई ठीक है। प्रतियोगी परीक्षा के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यम उपलब्ध हैं। किसी भी माध्यम से पढ़ाई कर सकते हैं।
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उमेश कुमार बताते हैं कि सोशल मीडिया पर कोचिंग संस्थान मामूली शुल्क या फिर मुफ्त शिक्षा दे रहे हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए सैकड़ों चैनल हैं। घर बैठे किसी भी परीक्षा की तैयारी कर सफलता हासिल कर सकते हैं।
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शिक्षक सुशील कुमार की मानें तो सोशल मीडिया पर पढ़ाई के अतिरिक्त खाना बनाने की विधि, इलेक्ट्रीशियन का काम, वेल्डिंग समेत कई मैकेनिकल काम आसानी से सीखे जा सकता है। देखकर सीखने में काम जल्दी समझ आता है।
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संचालक बोले, कोचिंग को लगा झटका
कोचिंग संचालक रजत दीक्षित बताते हैं कि ऑनलाइन पढ़ाई से ऑफलाइन कोचिंग को झटका लगा है। अब सिर्फ कक्षा 9 से 12 तक के बच्चे ही ऑफलाइन कोचिंग में दिखाई देते हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं के कोचिंग संस्थान बंद होने की कगार पर है।
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कोचिंग संचालक मनीष कुमार का कहना है कि ऑनलाइन पढ़ाई ने कोचिंग संस्थानों को नुकसान पहुंचाया है। ऑफलाइन पढ़ाई अच्छी होती है। परीक्षार्थी यूट्यूब चैनलों के चक्कर में पढ़कर भविष्य को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
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कंप्यूटर व मोबाइल से आंखों पर पड़ा असर
प्रोफेसर विनय ओझा के मुताबिक ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से पढ़ना अच्छा है, लेकिन ज्यादा देर तक मोबाइल या कंप्यूटर के सामने देखने से आंखों पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। इस कारण छोटी उम्र के बच्चों के आंखों की रोशनी कमजोर होती जा रही है।
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