फोटो 04::::गंदगी से नाले का रूप धारण कर चुकी सिरसा नदी।
संवाद न्यूज एजेंसी
जसवंतनगर। कस्बे से गुजरने वाली सिरसा नदी विलुप्त होने की कगार पर है। पानी कम होन जाने और चारों तरफ गंदगी अटी होने की वजह से नदी ने नाले का स्वरूप ले लिया है। नदी किनारे कब्जा होने से उसकी जमीन भी लोगों की नजर है।
चार दशक पहले तक इस नदी से किसान अपनी खेती की सिंचाई करते थे। नदी के पानी की वजह से नदी किनारे के इलाकों में जलस्तर भी अच्छा रहता था। अब हालत यह है कि सिरसा नदी एक गंदे नाले भर में तब्दील हो गई है। जगह- जगह सिल्ट, खरपतवार ,जलमंजनी और कूड़ा करकट इसमें जमा दिखते हैं। कई जगहों पर लोगों ने नदी के किनारे कब्जा कर लिया है।
किसान राम सिंह, भगवान सिंह, गिरजा शंकर, सुम्मेर सिंह, अनार सिंह, सिपाही लाल आदि का कहना है कि यदि इस नदी को साफ कर दिया जाए तो इलाके इलाके किसानों को इससे लाभ मिलेगा। सिंचाई के लिए हर समय पानी उपलब्ध होने लगेगा और जलस्तर 300-400 फुट और ऊपर आ जाएगा।
अखिलेश यादव की तत्कालीन सरकार में तत्कालीन लोक निर्माण और सिंचाई मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने सिरसा नदी को साफ कराने के लिए सरकारी खजाने से धन जारी किया था और काम भी हुआ था। सरकार जाने के बाद अब स्थिति फिर बदतर हो गई है।
अस्सी के दशक में यह नदी इटावा, फिरोजाबाद, मैनपुरी आदि जिलों के सैकड़ों गांवों में सिंचाई के लिए भरपूर पानी उपलब्ध कराती थी। नदी में पानी का बहाव इतना तेज रहता था कि बारिश के दिनों में तो बाढ़ आ जाती थी। मगर अब सिरसा नदी के एक नाला भर में तब्दील हो जाने से ज्यादा समय तक सूखी नजर आती है।
बीबामऊ, बलरई, नागरी, मानिकपुर, धरवार, राजपुर, तमेरी, सिसहाट, जसवंतनगर कस्बा, कैस्त, मलाजनी, भतौरा आदि गांव में सिरसा नदी प्रमुख सिंचाई साधनों में शुमार रही। इस नदी में ही जसवंतनगर कस्बा के सारे नाले गिरते थे। नालों में जलभराव नहीं रहता था। मगर अब ऐसा नहीं है न तो नदी की सफाई है और ना ही नदी में पानी का तेज बहाव ही कभी दिखता है।